नई दिल्ली। गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि रहेगी। पंचांग के अनुसार, इस दिन सुबह 8:17 बजे से 9:44 बजे तक अमृतकाल और सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा। वहीं, दोपहर 1:34 बजे से 2:58 बजे तक राहुकाल रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल में नए शुभ कार्यों की शुरुआत से बचना चाहिए। गुरुवार को दिशाशूल दक्षिण दिशा में रहेगा, इसलिए पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है।
चतुर्थी तिथि और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय
पंचांग के मुताबिक, कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर को रात 10:10 बजे तक रहेगी। इसके बाद पंचमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी, जो 30 अक्टूबर को रात 7:25 बजे तक रहेगी।
सूर्योदय सुबह 6:34 बजे और सूर्यास्त शाम 5:46 बजे होगा। चंद्रोदय रात 8:33 बजे होगा, जबकि अगले दिन चंद्रास्त सुबह 10:52 बजे बताया गया है।
अमृतकाल और अभिजीत मुहूर्त
गुरुवार को सुबह 8:17 बजे से 9:44 बजे तक अमृतकाल रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में इस समय को शुभ माना जाता है। इसे पूजा-पाठ, नए कार्यों की योजना और महत्वपूर्ण गतिविधियों के लिए अनुकूल समय माना जाता है।
वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा। परंपरागत रूप से इसे दिन के शुभ मुहूर्तों में गिना जाता है। हालांकि, किसी विशेष कार्य के लिए मुहूर्त तय करते समय स्थानीय पंचांग और संबंधित कार्य की परंपराओं को भी ध्यान में रखा जाता है।
राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल का समय
पंचांग में दिन के कुछ समय ऐसे बताए जाते हैं, जिनमें शुभ कार्यों की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है। 29 अक्टूबर के लिए दिए गए समय इस प्रकार हैं।
- राहुकाल: दोपहर 1:34 बजे से 2:58 बजे तक
- यमगंड काल: सुबह 6:34 बजे से 7:58 बजे तक
- गुलिक काल: सुबह 9:22 बजे से 10:46 बजे तक
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल और यमगंड काल में नए शुभ कार्य शुरू करने से परहेज किया जाता है। गुलिक काल को लेकर भी अलग-अलग परंपराओं में मान्यताएं प्रचलित हैं। इन समयों की गणना स्थान के अनुसार बदल सकती है।
परिघ योग के बाद शुरू होगा शिव योग
पंचांग के अनुसार, गुरुवार रात 12:05 बजे तक परिघ योग रहेगा। इसके बाद शिव योग शुरू होगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में परिघ योग को बाधाओं से जुड़ा माना जाता है, जबकि शिव योग को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।
किसी कार्य के लिए योग और मुहूर्त का चयन करते समय तिथि, नक्षत्र, स्थानीय समय और अन्य पंचांग संबंधी गणनाओं को साथ में देखा जाता है।
स्वाति नक्षत्र में रहेंगे सूर्य देव
इस दिन सूर्य देव स्वाति नक्षत्र में रहेंगे। स्वाति नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता पवन देव माने जाते हैं और इसके स्वामी राहु हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस नक्षत्र का संबंध स्वतंत्रता, गतिशीलता और अपने फैसले स्वयं लेने की प्रवृत्ति से जोड़ा जाता है।
गुरुवार को सूर्य तुला राशि में रहेंगे। वैदिक ज्योतिष में तुला राशि को सूर्य की नीच राशि माना जाता है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस स्थिति को आत्मविश्वास, नेतृत्व और निर्णय लेने की क्षमता से जोड़कर देखा जाता है।
वृषभ राशि में रहेंगे चंद्रमा
इस दिन चंद्र देव पूरे दिन और रात वृषभ राशि में संचार करेंगे। वैदिक ज्योतिष में वृषभ राशि में चंद्रमा को उच्च का माना जाता है। चंद्रमा को मन और भावनाओं का कारक माना जाता है, जबकि वृषभ राशि का स्वामी शुक्र है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, वृषभ राशि में चंद्रमा की स्थिति स्थिरता, धैर्य और भावनात्मक संतुलन से जुड़ी मानी जाती है।
दक्षिण दिशा में रहेगा दिशाशूल
गुरुवार को दिशाशूल दक्षिण दिशा में रहेगा। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, दिशाशूल वाली दिशा में यात्रा शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि यात्रा आवश्यक हो, तो लोग अपनी पारिवारिक या धार्मिक परंपराओं के अनुसार उपाय करते हैं।
पंचांग में बताए गए शुभ-अशुभ समय धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। इनके समय में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग से मिलान करना उचित रहेगा।

