मुजफ्फरनगर के भंडूरा गांव से भंडूर पुलिस चौकी तक जाने वाले रजवाहे में सोमवार रात पानी पहुंचते ही किसानों के चेहरे खिल उठे। 20 साल से सूखी पड़े इस रजवाहे में पानी की कल-कल सुनकर गांव वाले गूंज उठे। किसान एक-दूसरे को बधाई दे रहे हैं, “आखिरकार वो दिन आ गया!”

‘रास्ते’ ने बंद कर दी थी ‘पानी की राह’
करीब 20 साल पहले भंडूर पुलिस चौकी के पास रजवाहे को बंद कर सड़क बना दी गई थी, जो गांव बेहडा अस्सा को जोड़ती है। भिक्की की तरफ जाने वाले ये रजवाहा पुलिस चौकी से आगे खत्म हो गया था। पहले वाला हिस्सा तो बचा रहा, लेकिन बिना पानी के बेकार पड़ा था। फसलें सूखतीं, किसान परेशान होते और फसलों की सिंचाई का नए विकल्प तलाशते थे।

सिंचाई विभाग का जुगाड़ और जद्दोजहद
अधीक्षी अभियंता सुभाष चंद्रा, SDO प्रदीप कुमार और JE अशरफ ने कमाल कर दिखाया। सबसे बड़ी उलझन थी कि पुलिस चौकी से आगे रजवाहा बंद है, तो पीछे से अगर पानी छोड़ भी दिया जाए तो वो कहां जाएगा? विभाग ने गजब का जुगाड़ निकाला और पुलिस चौकी के सामने से गुजर रहे गर्बी रजवाहे (बड़ा रजवाहा) में इस पानी को जोड़ दिया। अब पानी बहेगा और बर्बाद नहीं होगा!
किसानों की खुशी का ठिकाना नहीं
किसान बोले, “20 साल इंतजार किया, आज लगता है दीवाली आ गई!” अब गेहूं, गन्ना, सब्जियां आसानी से सींची जाएंगी। कोई टैंकर नहीं, कोई झगड़ा नहीं। इस गांव भंडूरा से भिक्की तक के खेत हरे-भरे हो जाएंगे। बच्चे नहर किनारे खेल रहे, बुजुर्ग दुआएं दे रहे।

30 किमी लंबा, सैंकड़ों किसान प्रभावित
आपको ये भी बता दें कि इस रजवाहे से करीब 10 गांव और उनके सैंकड़ों किसान जुड़े हुए हैं, जो परेशान थे। लेकिन अब इस सैंकड़ों किसानों की मौज कटने वाली है। ये राजवाहा खाईखेडी–मोहम्मदपुर से शुरू होकर भंडूर तक आता है, जिसकी लंबाई तकरीबन 30 किमी है।

सिंचाई विभाग को सलाम
किसान नेता बोले,
“सुभाष चंद्रा, प्रदीप कुमार, अशरफ साहब… आपने हमारी जिंदगी बदल दी!” विभाग की यह मेहनत पूरे इलाके के लिए मिसाल बनेगी।”



