क्या मुज़फ़्फ़रनगर में DEF (Diesel Exhaust Fluid) का कारोबार बिना किसी प्रभावी निगरानी के तेजी से फैल रहा है? The X India की टीम द्वारा संबंधित विभागों, इस कारोबार से जुड़े लोगों, BS-6 डीजल इंजन मैकेनिकों, पुलिस रिकॉर्ड और गोपनीय सूत्रों के आधार पर किए गए एक विस्तृत सर्वे में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सर्वे के बाद जब टीम ने दिल्ली-देहरादून नेशनल हाईवे-58 पर राणा चौक से रामपुर तिराहा और वहां से सहारनपुर रोड स्थित रोहाना मिल तक करीब 23 किलोमीटर का स्थलीय निरीक्षण किया, तो पूरे मार्ग में 21 DEF बिक्री केंद्र संचालित मिले। यानी औसतन लगभग हर एक किलोमीटर पर एक DEF प्वाइंट। सवाल यह है कि आखिर इतने कम दायरे में DEF का कारोबार इतनी तेजी से कैसे फैल गया और इसकी गुणवत्ता तथा नियामकीय निगरानी कौन सुनिश्चित कर रहा है?

कुकुरमुत्तों की तरह बढ़ते DEF प्वाइंट, हर किलोमीटर पर बिक्री
निरीक्षण के दौरान टीम ने सड़क के दोनों ओर संचालित DEF बिक्री केंद्रों का दस्तावेजीकरण किया। केवल 23 किलोमीटर के दायरे में 21 प्वाइंट मिलना इस कारोबार के तेजी से विस्तार की ओर इशारा करता है। इन 21 पॉइंट पर 70 से अधिक नोज़िल टैंक रखे हुए है। हर टैंक में एक हज़ार लीटर DEF होता है।
स्थानीय लोगों और ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में ऐसे प्वाइंटों की संख्या तेजी से बढ़ी है और अब हाईवे पर लगभग हर एक किमी की दूरी पर DEF उपलब्ध होने का दावा करने वाले केंद्र दिखाई देने लगे हैं।

गुणवत्ता पर सबसे बड़ा सवाल
सर्वे के दौरान सबसे अहम सवाल गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर सामने आया।
निरीक्षण के दौरान किसी भी बिक्री केंद्र पर उपलब्ध DEF की लैब टेस्ट रिपोर्ट नहीं दिखाई गई। उद्योग मानकों के अनुसार DEF की प्रत्येक खेप का गुणवत्ता परीक्षण किया जाना और उसका रिकॉर्ड उपलब्ध होना महत्वपूर्ण माना जाता है।
सर्वे में क्या दावा किया गया है?
The X India की टीम के इस गोपनीय सर्वे का दावा है कि जिले में संचालित कई कथित निर्माण इकाइयों में मानक ग्रेड-ए यूरिया के स्थान पर खेती में प्रयुक्त फर्टिलाइजर यूरिया, फिटकरी तथा अन्य रासायनिक पदार्थों का उपयोग कर निम्न गुणवत्ता का नकली DEF तैयार किया जा रहा है।
सर्वे में यह भी सामने आया है कि ऐसे उत्पादों को कम लागत पर तैयार कर हाईवे किनारे बिक्री केंद्रों तक पहुंचाया जाता है, जहां उन्हें असली DEF के रूप में बेचा जाता है।

₹5 प्रति लीटर की खरीद, ₹30–40 प्रति लीटर की सेल
हमारे सर्वे में सबसे घातक और सोचने पर मजबूर कर देने वाला तथ्य ये सामने आया है कि हाईवे पर बैठे इस तरह के बिक्री प्वाइंट वाले लोग महज़ 5 रूपये से 10 रूपये प्रति लीटर इस फेक एवं मानक हीन DEF को असली बताकर 30 से 40 रुपए प्रति लीटर तक बेच रहे हैं।
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प्रदूषण और फायर सेफ्टी पर भी सवाल
सर्वे के दौरान यह दावा भी सामने आया कि कई निर्माण इकाइयों के पास प्रदूषण नियंत्रण और फायर सेफ्टी से जुड़ी आवश्यक स्वीकृतियां उपलब्ध नहीं हैं।
इस संबंध में स्थानीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी गीतेश चंद्रा ने बताया कि उनके विभाग से DEF निर्माण इकाइयों के लिए कोई NOC जारी नहीं की गई है। वहीं मुख्य अग्निशमन अधिकारी अनुराग सिंह ने भी कहा कि उनके विभाग से भी ऐसी किसी निर्माण इकाई को NOC जारी नहीं हुई है।

पहले भी पकड़ी जा चुकी है कथित नकली DEF फैक्ट्री
मुज़फ़्फ़रनगर में 7 नवंबर 2024 को शहर कोतवाली पुलिस ने खांजापुर गांव के जंगल में संचालित एक नकली DEF निर्माण इकाई का भंडाफोड़ किया था।
पुलिस ने वहां से विभिन्न ब्रांडों की पैकिंग सामग्री, बड़ी मात्रा में नकली DEF, फर्टिलाइजर यूरिया और अन्य सामग्री बरामद करने का दावा किया था। इस मामले में इस पूरे सिंडिकेट का माफिया सरगना गांव लड़वा निवासी पारस कश्यप समेत उसके साथी फरीद, सनव्वर, विश्वास और सचिन को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।

सबसे बड़ा सवाल… निगरानी कौन करेगा?
जब केवल 23 किलोमीटर के दायरे में 21 DEF बिक्री केंद्र संचालित मिल रहे हों, तो स्वाभाविक रूप से कई सवाल खड़े होते हैं। क्या सभी केंद्रों पर बिकने वाला DEF निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप है? क्या हर निर्माण इकाई आवश्यक तकनीकी और वैधानिक मानकों का पालन कर रही है? और क्या इस तेजी से फैलते कारोबार की नियमित निगरानी की जा रही है?
इन सवालों के जवाब अब संबंधित विभागों की जांच और कार्रवाई से ही सामने आएंगे।
‘हर पॉइंट पर नकली DEF’: सूत्र
सर्वे के दौरान इस काले कारोबार से जुड़े कई लोगों से वार्ता हुई। जिन्होंने दावा किया है कि मुजफ्फरनगर के हर बिक्री प्वाइंट पर 100% नकली DEF बेचा जा रहा है। सूत्रों का ये भी दावा है कि इनमें से कई बिक्री प्वाइंट पर टाटा, अशोक लीलैंड आदि समेत कई ब्रांड की DEF की नकली बाल्टी भी असली बताकर बेची जा रही है।

इंजनों के लिए बेहद ख़तरनाक नकली DEF
BS 6 डीजल इंजिन वाहनों के कई मैकेनिक से हुई वार्ता से पता चला है कि अधिकांश नकली एवं गुणवत्ता हीन DEF के इस्तेमाल से गाड़ियों के इंजिन के फिल्टर चौक हो जाते हैं। इसके बाद इंजन का पूरा एग्जॉस्ट सिस्टम खराब हो जाता है।
एक अनुमान के मुताबो, नकली DEF के इस्तेमाल की वजह से ही 70 फीसदी BS6 गाड़ियां खराब हो रही हम
आगे क्या?
‘The X India’ के अगले अंक में हम आपको बताएंगे असली–नकली DEF में अंतर, कैसे बनाया जाता है नकली DEF, मुजफ्फरनगर में कहां–कहां बनाया जा रहा है नकली DEF और आखिर क्यों असली बताकर बेचा जा रहा है नकली DEF तथा दोनों के मुनाफे में कितना है अंतर!
इसके साथ ही अगले अंक में हम उन लोगों के नाम भी उजागर करेंगे, जो इस काले कारोबार से जुड़े हुए हैं।


