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बांदा में साइबर ठगों के ‘इंटरनेशनल लेवल’ के सिंडिकेट का भंडाफोड़, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के नीचे से दबोचे गए 9 शातिर, मोबाइल हैक कर लगाते थे चूना

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बांदा। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में पुलिस की संयुक्त टीम ने डिजिटल डकैती डालने वाले एक बेहद शातिर और संगठित साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश किया है। जनपद की साइबर क्राइम टीम, कोतवाली नगर पुलिस और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने एक साझा ऑपरेशन चलाकर इस गिरोह के 9 मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। यह गिरोह एपीके (APK) फाइल और खतरनाक मैलवेयर लिंक भेजकर पलक झपकते ही लोगों के मोबाइल फोन हैक कर लेता था। इतना ही नहीं, यह नेटवर्क आम मासूम लोगों को झांसे में लेकर उनके आधार, पैन कार्ड जैसे गोपनीय दस्तावेज हासिल करता था और उनके नाम पर फर्जी फर्में व शेल कंपनियां बनाकर बैंक खाते खुलवाता था, ताकि ठगी की काली कमाई को ठिकाने लगाया जा सके।

संदिग्ध बैंक खाते ने खोला राज, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के नीचे घेराबंदी कर दबोचा

सहायक पुलिस अधीक्षक (एएसपी) नगर मेविस टॉक ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस बड़े नेटवर्क का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि साइबर क्राइम थाने की टीम लगातार संदिग्ध और भारी ट्रांजैक्शन वाले बैंक खातों की मॉनिटरिंग कर रही थी। इसी दौरान एक ऐसे खाते का पता चला, जिसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से ठगी गई रकम जमा हो रही थी। कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस ने 11 जुलाई की रात मवई बाइपास के पास से मुख्य संदिग्ध खाताधारक प्रेम प्रकाश को हिरासत में लिया। जब पुलिसिया अंदाज में उससे कड़ी पूछताछ की गई, तो उसने उगल दिया कि उसके गिरोह के बाकी सदस्य एक बड़ी बोलेरो गाड़ी में सवार होकर बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के नीचे किसी नई बड़ी ठगी की योजना बना रहे हैं।

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सूचना मिलते ही एसओजी और कोतवाली पुलिस ने आधी रात को एक्सप्रेस-वे के नीचे घेराबंदी की और बोलेरो कार में छिपे बैठे 8 अन्य आरोपियों को रंगे हाथों दबोच लिया। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उनका नेटवर्क बेहद व्यवस्थित तरीके से काम करता था— कुछ लोग मोबाइल हैक करने वाले लिंक बनाते थे, कुछ फर्जी सिम और जाली दस्तावेज इकट्ठा करते थे, और कुछ लोग खातों से कैश निकालने (मनी लॉन्ड्रिंग) का काम संभालते थे। जैसे ही इन्हें भनक लगती थी कि पीड़ित ने शिकायत कर दी है और बैंक खाता होल्ड होने वाला है, ये तुरंत अपने मोबाइल फोन और सिम कार्ड तोड़कर नदी या सुनसान जगहों पर फेंक देते थे ताकि डिजिटल साक्ष्य मिटाए जा सकें।

बरामद हुआ भारी मात्रा में डिजिटल असला-बारूद, टीम को 20 हजार का इनाम

“यह एक बेहद संगठित गिरोह था जो तकनीक का दुरुपयोग कर लोगों की गाढ़ी कमाई लूट रहा था। इनके कब्जे से 52,475 रुपये नकद, ठगी में प्रयुक्त एक सफेद बोलेरो गाड़ी, एक लैपटॉप, 10 महंगे टचस्क्रीन मोबाइल फोन, 6 चालू एटीएम कार्ड, एक चेकबुक और एक पैन कार्ड बरामद किया गया है। इन सभी डिजिटल उपकरणों को फॉरेंसिक लैब भेजा जा रहा है ताकि इनके पूरे नेक्सस और अब तक की गई करोड़ों की ठगी का डेटा रिकवर किया जा सके।” – मेविस टॉक, सहायक पुलिस अधीक्षक नगर

इस शानदार और त्वरित कामयाबी से खुश होकर बांदा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) पलाश बंसल ने साइबर सेल, एसओजी और कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम की पीठ थपथपाई है और पूरी टीम को 20 हजार रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की है।

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ये हैं सलाखों के पीछे पहुंचे गिरोह के 9 ‘साइबर विलेन’:

पुलिस द्वारा जारी सूची के अनुसार गिरफ्तार अभियुक्तों में बांदा जनपद के ही शातिर शामिल हैं:

  • प्रेम प्रकाश (जवाहर नगर नरैनी)

  • सूरज (बिजली खेड़ा, कोतवाली नगर)

  • समीर (किरन कॉलेज चौराहा)

  • अभिषेक (जरैली कोठी)

  • जीतू (कंचनपुरवा)

  • योगेश (पल्हरी)

  • कृष्णा (डिग्गी चौराहा)

  • सुशील कुमार (कनवारा)

  • मुकेश कुमार (सहरी, थाना मटौंध)

पुलिस अब इन सभी आरोपियों को रिमांड पर लेकर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन्हें एक्टिवेटेड सिम कार्ड और बैंक खाते खोलने में किन-किन बैंक कर्मचारियों या स्थानीय एजेंटों ने मदद पहुंचाई थी।

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