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मुज़फ़्फ़रनगर में कांवड़ शिविर का टेंट उखाड़ने पर भड़के सामाजिक संगठन, जानें मीनाक्षी चौक के हंगामे की पूरी इनसाइड स्टोरी

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मुज़फ़्फ़रनगर। सावन कांवड़ यात्रा-2026 शुरू होने से पहले मुज़फ़्फ़रनगर में कांवड़ सेवा शिविर को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। शहर के सबसे महत्वपूर्ण मीनाक्षी चौक पर वर्षों से लगने वाले परंपरागत कांवड़ सेवा शिविर का टेंट लगाए जाने से पहले ही पुलिस प्रशासन ने कार्य रुकवा दिया। इसके विरोध में सोमवार शाम करीब 6 बजे सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों, वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों ने मौके पर ही धरना शुरू कर दिया, जिससे करीब दो से तीन घंटे तक हाई वोल्टेज ड्रामा चलता रहा।

दरअसल, सामाजिक संगठन पूर्व की भांति कांवड़ सेवा शिविर स्थापित करने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर टेंट लगाने पर आपत्ति जताई। इसे लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। पुलिस की कार्रवाई से नाराज सामाजिक कार्यकर्ताओं ने धरने पर बैठकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

धरने की सूचना मिलते ही मौके पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए। ‘मुजफ्फरनगर बुलेटिन’ के संपादक एवं प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य अंकुर दुआ भी टीम के साथ धरने पर बैठ गए। जिसके बाद मीनाक्षी चौक पर काफी देर तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।

सामाजिक संगठनों का आरोप था कि वर्षों से संचालित हो रहे शिविर को इस बार बिना पर्याप्त कारण रोका जा रहा है, जबकि प्रशासन का कहना था कि कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को देखते हुए शासन द्वारा निर्धारित मानकों का पालन कराया जा रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री कपिलदेव अग्रवाल स्वयं धरनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने धरने पर बैठे प्रतिनिधियों और पुलिस प्रशासन के अधिकारियों से अलग-अलग वार्ता की तथा पूरे मामले की जानकारी ली।

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पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी सेवा शिविर का विरोध नहीं किया जा रहा है, बल्कि सभी शिविरों को शासन द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप स्थापित कराया जा रहा है ताकि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो।

राज्य मंत्री कपिलदेव अग्रवाल के हस्तक्षेप और उचित समाधान के आश्वासन के बाद सामाजिक संगठनों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।

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