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सावन शिवरात्रि पर बन रहे दुर्लभ योग: जानें जलाभिषेक का सबसे शुभ मुहूर्त, राहुकाल में भूलकर भी न करें पूजा!

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नई दिल्ली। सावन महीने की शिवरात्रि भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद विशेष मानी जाती है। इस वर्ष 11 अगस्त 2026, मंगलवार को श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन शिवरात्रि पर विधि-विधान से भगवान भोलेनाथ की पूजा और जलाभिषेक करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। भक्त इस दिन महादेव की आराधना कर सुख, शांति और मनोकामना पूर्ति की कामना करते हैं।

हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है। किसी शुभ कार्य की शुरुआत, यात्रा, पूजा-पाठ, निवेश अथवा अन्य महत्वपूर्ण कार्यों से पहले पंचांग देखकर शुभ-अशुभ समय का निर्धारण किया जाता है। पंचांग हिंदू काल गणना की ऐसी पद्धति है, जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर तिथि, नक्षत्र और विभिन्न योगों की जानकारी देती है।

रात 1:53 बजे तक रहेगी चतुर्दशी तिथि

पंचांग के अनुसार 11 अगस्त 2026, मंगलवार को श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि रात 1:53 बजे तक रहेगी। इसके बाद अमावस्या तिथि शुरू हो जाएगी। इसी दिन सावन महीने की शिवरात्रि मनाई जाएगी।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विधि-विधान से पूजन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। भक्त महादेव को जल, बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करेंगे।

सुबह 7:58 से 9:25 बजे तक अमृत काल

11 अगस्त को सुबह 7:58 बजे से 9:25 बजे तक अमृत काल रहेगा। पंचांग में अमृत काल को शुभ समय माना जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान करना विशेष फलदायी माना जाता है।

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वहीं दिन का अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:06 बजे से 12:57 बजे तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त को दिन के प्रमुख शुभ समयों में शामिल किया जाता है। इस अवधि में शुभ कार्यों की शुरुआत करना परंपरागत रूप से अनुकूल माना जाता है।

सिद्धि योग के बाद लगेगा व्यतिपात योग

मंगलवार को शाम 6:51 बजे तक सिद्धि योग रहेगा। इसके बाद व्यतिपात योग शुरू हो जाएगा। पंचांग के अनुसार सिद्धि योग को शुभ कार्यों और धार्मिक गतिविधियों के लिए अनुकूल माना जाता है।

इस दिन सूर्य अश्लेषा नक्षत्र में स्थित रहेगा। वहीं चंद्रमा सुबह 10:09 बजे तक पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा और इसके बाद पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेगा।

सूर्योदय सुबह 6:05 बजे, सूर्यास्त शाम 6:58 बजे

11 अगस्त को सूर्योदय सुबह 6:05 बजे होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6:58 बजे होगा। चंद्रमा का चंद्रोदय सुबह 4:10 बजे और चंद्रास्त शाम 6:07 बजे होगा।

पंचांग के अनुसार मंगलवार को सूर्य कर्क राशि में स्थित रहेगा। चंद्रमा भी कर्क राशि में ही रहेगा। ग्रहों की इन स्थितियों को ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

राहुकाल में नए काम शुरू करने से बचें

मंगलवार को राहुकाल दोपहर 3:45 बजे से शाम 5:22 बजे तक रहेगा। इसके अलावा गुलिक काल दोपहर 12:32 बजे से 2:08 बजे तक और यमगंड काल सुबह 9:18 बजे से 10:55 बजे तक रहेगा।

पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड काल को नए शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। इसलिए इन अवधियों में नए कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।

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उत्तर दिशा में रहेगा दिशाशूल

11 अगस्त, मंगलवार को उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिषीय और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार दिशाशूल के दौरान संबंधित दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है।

यदि किसी कारण से उत्तर दिशा की यात्रा करना आवश्यक हो तो मान्यताओं के अनुसार कुछ पारंपरिक ज्योतिषीय उपायों के बाद यात्रा शुरू की जा सकती है। हालांकि ऐसे उपाय धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं और इन्हें आस्था के संदर्भ में ही देखा जाता है।

सावन शिवरात्रि पर महादेव की आराधना का विशेष महत्व

सावन भगवान शिव को समर्पित महीना माना जाता है और इसी महीने पड़ने वाली शिवरात्रि का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। श्रद्धालु इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और बेलपत्र, फूल, फल आदि अर्पित करते हैं।

मान्यता है कि सावन शिवरात्रि पर श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान भोलेनाथ की पूजा करने से भक्तों को विशेष फल की प्राप्ति होती है। शिवभक्त इस अवसर पर उपवास रखते हैं और मंदिरों में पहुंचकर महादेव का अभिषेक करते हैं।

पंचांग के अनुसार 11 अगस्त का दिन सावन शिवरात्रि के कारण धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रहेगा। अमृत काल और अभिजित मुहूर्त जैसे शुभ समयों में पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्य किए जा सकते हैं, जबकि राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड काल में नए कार्य शुरू करने से परंपरागत रूप से बचने की सलाह दी जाती है।

 


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