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ओणम पर वामन देव और गणेश जी की पूजा का बन रहा है खास संयोग,जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त

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नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना गया है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा पाठ, यात्रा, निवेश या धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत से पहले पंचांग देखकर तिथि, नक्षत्र, योग और शुभ अशुभ मुहूर्त का विचार किया जाता है। पंचांग हिंदू काल गणना की ऐसी पारंपरिक व्यवस्था है, जिसमें सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर दिन की धार्मिक और ज्योतिषीय गणनाएं की जाती हैं।

बुधवार 26 अगस्त 2026 को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि सुबह 7:59 बजे तक रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी तिथि का आरंभ हो जाएगा। इस दिन ओणम का मुख्य पर्व थिरुवोणम मनाया जाएगा। ओणम विशेष रूप से केरल का प्रमुख त्योहार है, लेकिन देश के विभिन्न हिस्सों में भी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवसर पर भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा करने का विशेष महत्व है।

बुधवार को गणेश पूजन से मिलेगा शुभ फल

26 अगस्त को बुधवार होने के कारण भगवान गणेश की पूजा का भी विशेष महत्व रहेगा। हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभ कार्यों का देवता माना जाता है। मान्यता है कि किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश जी की पूजा करने से बाधाएं दूर होती हैं और कार्य की सफलता के लिए सकारात्मक वातावरण बनता है।

ओणम के अवसर पर भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा करने के साथ भगवान गणेश का स्मरण और पूजन करना भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी माना जा सकता है।

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

26 अगस्त बुधवार को सूर्योदय सुबह 6:10 बजे होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6:46 बजे होगा। चंद्रमा का उदय शाम 5:47 बजे होगा और अगले दिन तड़के 5:08 बजे चंद्रास्त होगा।

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दिन की शुरुआत धार्मिक कार्यों और पूजा पाठ के लिए शुभ समय देखकर की जा सकती है। स्थानीय समय और स्थान के अनुसार पंचांग के समय में थोड़ा अंतर संभव है।

तिथि और नक्षत्र का महत्व

पंचांग के अनुसार 26 अगस्त को श्रावण शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि सुबह 7:59 बजे तक रहेगी। इसके बाद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। इसी कारण दिन के आरंभ में त्रयोदशी और इसके बाद चतुर्दशी तिथि का प्रभाव रहेगा।

इस दिन चंद्रमा मकर राशि में स्थित रहेगा और मुख्य रूप से श्रवण नक्षत्र में रहेगा। सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा। श्रवण नक्षत्र का संबंध भगवान विष्णु से भी माना जाता है, इसलिए ओणम के अवसर पर विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।

सौभाग्य योग के बाद बनेगा शोभन योग

बुधवार को सुबह 7:58 बजे तक सौभाग्य योग रहेगा। इसके बाद शोभन योग का आरंभ होगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में सौभाग्य और शोभन योग को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।

दिन में अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:57 बजे से 12:48 बजे तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त को दिन के प्रमुख शुभ समयों में शामिल किया जाता है। इस अवधि में भगवान का पूजन, धार्मिक अनुष्ठान और अन्य शुभ कार्य किए जा सकते हैं।

दोपहर 1:32 से 3:15 बजे तक अमृत काल

26 अगस्त को अमृत काल दोपहर 1:32 बजे से 3:15 बजे तक रहेगा। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार अमृत काल को शुभ कार्यों और विशेष पूजा के लिए अनुकूल समय माना जाता है।

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हालांकि इस दिन राहुकाल भी दोपहर के समय रहेगा, इसलिए किसी विशेष कार्य के लिए पंचांग के सभी मुहूर्तों का विचार करना उचित माना जाता है।

राहुकाल और अन्य अशुभ समय

बुधवार को राहुकाल दोपहर 12:28 बजे से 2:03 बजे तक रहेगा। इसके अलावा गुलिक काल सुबह 10:54 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक रहेगा। यमगंड काल सुबह 7:45 बजे से 9:19 बजे तक रहेगा।

पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड जैसे समयों में नए और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है। जरूरी कार्य होने पर व्यक्ति अपनी परंपरा और मान्यता के अनुसार पूजा पाठ या अन्य शुभ उपाय करके कार्य शुरू कर सकता है।

उत्तर दिशा में रहेगा दिशाशूल

26 अगस्त बुधवार को उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु की पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार दिशाशूल वाले दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है।

यदि उत्तर दिशा की यात्रा आवश्यक हो तो प्रस्थान से पहले धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ उपाय किए जा सकते हैं। यात्रा करने वाले लोगों को स्थानीय पंचांग और अपनी परंपरा के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।

ओणम पर वामन अवतार की पूजा का धार्मिक महत्व

ओणम भगवान विष्णु के वामन अवतार और राजा महाबली से जुड़ा प्रमुख पर्व माना जाता है। धार्मिक कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा महाबली से तीन पग भूमि मांगी थी। बाद में वामन रूप में भगवान ने अपने विराट स्वरूप से तीनों लोकों को नाप लिया।

ओणम के अवसर पर घरों में विशेष सजावट की जाती है, पूजा पाठ किया जाता है और पारंपरिक रीति रिवाजों के साथ पर्व मनाया जाता है। केरल में इस पर्व का विशेष सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है। देश के अन्य हिस्सों में भी भगवान विष्णु और वामन अवतार की पूजा श्रद्धा के साथ की जाती है।

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26 अगस्त का पंचांग एक नजर में

दिन बुधवार रहेगा। श्रावण शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि सुबह 7:59 बजे तक रहेगी और इसके बाद चतुर्दशी तिथि शुरू होगी। सूर्योदय सुबह 6:10 बजे और सूर्यास्त शाम 6:46 बजे होगा। चंद्रोदय शाम 5:47 बजे और चंद्रास्त अगले दिन तड़के 5:08 बजे होगा।

सौभाग्य योग सुबह 7:58 बजे तक रहेगा, जिसके बाद शोभन योग प्रारंभ होगा। अभिजित मुहूर्त सुबह 11:57 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक रहेगा। अमृत काल दोपहर 1:32 बजे से 3:15 बजे तक रहेगा। राहुकाल दोपहर 12:28 बजे से 2:03 बजे तक, गुलिक काल सुबह 10:54 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक और यमगंड काल सुबह 7:45 बजे से 9:19 बजे तक रहेगा।

सूर्य सिंह राशि में और चंद्रमा मकर राशि में स्थित रहेगा। उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा। ओणम के मुख्य दिन थिरुवोणम पर भगवान विष्णु के वामन अवतार के साथ भगवान गणेश की पूजा करना भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखेगा।

 

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