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यूपीआई के 10 साल पूरे, पीएम मोदी बोले डिजिटल पेमेंट क्रांति पर हर भारतीय को होना चाहिए गर्व

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नई दिल्ली। भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी यूपीआई ने मंगलवार को अपनी शुरुआत के 10 वर्ष पूरे कर लिए। इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपीआई की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि देश की इस डिजिटल पेमेंट क्रांति पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एक दशक पहले यूपीआई की शुरुआत भारत की डिजिटल पेमेंट यात्रा में अब तक का सबसे निर्णायक फैसला साबित हुई है। उन्होंने देशवासियों से यूपीआई के साथ अपने अनुभव साझा करने की अपील करते हुए यह भी बताने को कहा कि इस डिजिटल भुगतान व्यवस्था ने उनके जीवन को किस तरह प्रभावित किया है।

एक दशक पहले शुरू हुई यात्रा आज बनी डिजिटल भुगतान की रीढ़

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम यानी एनपीसीआई ने 25 अगस्त 2016 को यूपीआई को लॉन्च किया था। शुरुआत में सीमित दायरे में उपलब्ध रही यह भुगतान व्यवस्था धीरे धीरे देश के करोड़ों लोगों के रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन गई।

आज मोबाइल फोन के जरिए कुछ ही क्षणों में भुगतान करने की सुविधा ने खरीदारी से लेकर कारोबार और विभिन्न प्रकार के डिजिटल लेनदेन को काफी आसान बना दिया है। यूपीआई की सरलता और इंटरऑपरेबिलिटी ने इसे देश की डिजिटल भुगतान व्यवस्था की रीढ़ बना दिया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया डिजिटल पेमेंट का निर्णायक पड़ाव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यूपीआई के 10 वर्ष पूरे होने पर कहा कि एक दशक पहले इसकी शुरुआत भारत की डिजिटल पेमेंट यात्रा में अब तक का सबसे निर्णायक फैसला साबित हुई है।

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उन्होंने यूपीआई के व्यापक पैमाने और इसकी पहुंच को भारत की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि इस डिजिटल भुगतान क्रांति पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने आम लोगों से अपने यूपीआई अनुभव साझा करने की अपील भी की, ताकि यह सामने आ सके कि डिजिटल भुगतान ने लोगों की जिंदगी को किस तरह आसान बनाया है।

1.78 करोड़ से बढ़कर 24,162 करोड़ पहुंचा सालाना लेनदेन

वित्त मंत्रालय के आंकड़े यूपीआई की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता की तस्वीर साफ तौर पर पेश करते हैं। वित्त वर्ष 2016-17 में यूपीआई के जरिए केवल 1.78 करोड़ लेनदेन हुए थे।

इसके मुकाबले वित्त वर्ष 2025-26 में यूपीआई के जरिए होने वाले वार्षिक लेनदेन की संख्या बढ़कर 24,162 करोड़ हो गई। यानी लगभग एक दशक के दौरान यूपीआई लेनदेन की संख्या में करीब 13 हजार गुना की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई।

यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि डिजिटल भुगतान अब भारतीय अर्थव्यवस्था और आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

लेनदेन की रकम में भी आया अभूतपूर्व उछाल

यूपीआई के इस्तेमाल में केवल लेनदेन की संख्या ही नहीं बढ़ी, बल्कि इसके जरिए होने वाले कुल वित्तीय लेनदेन की वैल्यू में भी भारी वृद्धि दर्ज की गई है।

वित्त मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2016-17 में यूपीआई लेनदेन की कुल वैल्यू महज 0.07 लाख करोड़ रुपए थी। वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 314 लाख करोड़ रुपए हो गया।

इस तरह करीब एक दशक में यूपीआई के जरिए होने वाले लेनदेन की कुल वैल्यू में लगभग 4,000 गुना की वृद्धि हुई है। यह आंकड़ा भारत में डिजिटल भुगतान के बढ़ते पैमाने और लोगों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।

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छोटे दुकानदार से बड़े कारोबार तक पहुंची यूपीआई की सुविधा

यूपीआई की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि डिजिटल भुगतान की सुविधा केवल बड़े कारोबार और महानगरों तक सीमित नहीं रही। छोटे दुकानदारों, रेहड़ी पटरी वालों, स्थानीय कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं तक भी यह सुविधा तेजी से पहुंची।

मोबाइल फोन के जरिए तत्काल भुगतान की सुविधा ने नकद लेनदेन पर निर्भरता को कम करने में मदद की है। बाजारों में छोटी खरीदारी से लेकर बड़े कारोबारी भुगतान तक यूपीआई का इस्तेमाल लगातार बढ़ा है।

दुनिया में भी भारत के यूपीआई मॉडल की गूंज

वित्त मंत्रालय के अनुसार यूपीआई के बड़े पैमाने, भरोसे और इंटरऑपरेबिलिटी को दुनिया भर में पहचान मिली है। भारत की इस डिजिटल भुगतान प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक प्रभावी रियल टाइम पेमेंट मॉडल के रूप में देखा गया है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ ने लेनदेन की मात्रा के आधार पर यूपीआई को दुनिया का सबसे बड़ा रियल टाइम पेमेंट सिस्टम माना है। वर्ष 2025 तक दुनिया भर में होने वाले रियल टाइम पेमेंट लेनदेन के कुल वॉल्यूम में यूपीआई की हिस्सेदारी लगभग 49 प्रतिशत थी।

डिजिटल इंडिया की दिशा में बड़ा मील का पत्थर

यूपीआई के दस वर्ष पूरे होना भारत के डिजिटल बदलाव की यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। इस व्यवस्था ने न केवल भुगतान को तेज और सुविधाजनक बनाया, बल्कि डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार को भी गति दी है।

यूपीआई के जरिए होने वाले लेनदेन की संख्या और वैल्यू में लगातार हुई वृद्धि ने यह दिखाया है कि भारतीय उपभोक्ता और कारोबारी डिजिटल भुगतान को तेजी से अपना रहे हैं। आने वाले समय में यूपीआई की पहुंच और उपयोग के और बढ़ने की उम्मीद है।

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दस साल में डिजिटल भुगतान की बदली पूरी तस्वीर

यूपीआई की दस साल की यात्रा भारत में तकनीक और वित्तीय सेवाओं के बदलते स्वरूप की कहानी भी है। जहां एक दशक पहले डिजिटल भुगतान अपेक्षाकृत सीमित था, वहीं आज मोबाइल के जरिए तत्काल भुगतान आम जीवन का हिस्सा बन चुका है।

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा यूपीआई की उपलब्धियों पर गर्व करने की बात इस डिजिटल परिवर्तन के व्यापक प्रभाव को रेखांकित करती है। दस वर्षों में यूपीआई ने भारत में भुगतान के तरीके को बदलने के साथ ही डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

 

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