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सूर्य देव की पूजा का खास योग, जानें अभिजित मुहूर्त और दिशाशूल

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नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना गया है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ, यात्रा, निवेश या नए काम की शुरुआत से पहले पंचांग देखकर शुभ और अशुभ समय का विचार किया जाता है। पंचांग हिंदू काल गणना की ऐसी पारंपरिक पद्धति है, जिसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण के साथ सूर्य, चंद्रमा तथा अन्य ग्रहों की स्थिति का भी आकलन किया जाता है।

30 अगस्त 2026 रविवार को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि सुबह 9 बजकर 37 मिनट तक रहेगी। इसके बाद तृतीया तिथि शुरू हो जाएगी। भाद्रपद मास को धार्मिक दृष्टि से बेहद पवित्र माना जाता है। इस महीने भगवान विष्णु और भगवान श्रीकृष्ण की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। रविवार होने के कारण इस दिन सूर्य देव की पूजा और उपासना भी फलदायी मानी जाती है।

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की द्वितीया के बाद शुरू होगी तृतीया

पंचांग के अनुसार 30 अगस्त को सुबह 9 बजकर 37 मिनट तक कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि रहेगी। इसके बाद कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि प्रारंभ हो जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तिथि के अनुसार पूजा और धार्मिक अनुष्ठान करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। ऐसे में रविवार को भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण और सूर्य देव की आराधना करना शुभ माना जा रहा है।

रविवार को सूर्य पूजा का विशेष महत्व

रविवार का दिन भगवान सूर्य को समर्पित माना जाता है। इस दिन सूर्योदय के समय सूर्य देव को जल अर्पित करने और श्रद्धापूर्वक पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि सूर्य उपासना से आत्मविश्वास, यश और ऊर्जा की प्राप्ति होती है। भाद्रपद माह में भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की आराधना के साथ सूर्य देव की पूजा धार्मिक दृष्टि से विशेष मानी जा रही है।

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सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

30 अगस्त को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 12 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 42 मिनट पर होगा। चंद्रमा का उदय रात 8 बजकर 1 मिनट पर होगा। अगले दिन 31 अगस्त को सुबह 8 बजकर 49 मिनट पर चंद्रास्त होगा।

मघा नक्षत्र में सूर्य, मीन राशि में रहेगा चंद्रमा

पंचांग के अनुसार 30 अगस्त को सूर्य मघा नक्षत्र में स्थित रहेगा। चंद्रमा मीन राशि में रहेगा। चंद्रमा अगले दिन तड़के 3 बजकर 44 मिनट तक उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इसके बाद रेवती नक्षत्र शुरू हो जाएगा।

ज्योतिषीय गणना के अनुसार रविवार को सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा। सूर्य की यह स्थिति भी इस दिन को सूर्य उपासना के लिए महत्वपूर्ण बनाती है।

शूल योग में बीतेगा रविवार का दिन

30 अगस्त को हर्षण योग नहीं रहेगा, बल्कि शूल योग रहेगा। पंचांग के अनुसार शूल योग अगले दिन सुबह 3 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में अलग-अलग योगों का शुभ कार्यों पर प्रभाव माना जाता है। इसलिए किसी भी महत्वपूर्ण कार्य को शुरू करने से पहले पंचांग में मौजूद योग और अन्य शुभ अशुभ काल का विचार करना उपयोगी माना जाता है।

अभिजित मुहूर्त में कर सकते हैं शुभ कार्य

रविवार को अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 2 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। पंचांग में अभिजित मुहूर्त को दिन के प्रमुख शुभ समयों में गिना जाता है। इस अवधि में शुभ और महत्वपूर्ण कार्य करने की परंपरा है। हालांकि किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान या मांगलिक कार्य के लिए स्थानीय पंचांग और व्यक्तिगत ज्योतिषीय गणना को भी ध्यान में रखना उचित माना जाता है।

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रात में रहेगा अमृत काल

30 अगस्त को अमृत काल रात 11 बजकर 8 मिनट से शुरू होकर रात 12 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में अमृत काल को शुभ समय माना जाता है। इस दौरान पूजा, ध्यान और धार्मिक गतिविधियां करना शुभ माना जाता है।

राहुकाल में नए काम की शुरुआत से बचें

रविवार को राहुकाल शाम 5 बजकर 9 मिनट से 6 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा गुलिक काल दोपहर 3 बजकर 35 मिनट से शाम 5 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। यमगंड काल दोपहर 12 बजकर 27 मिनट से 2 बजकर 1 मिनट तक रहेगा।

पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड जैसे समय को नए शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। इसलिए इस अवधि में महत्वपूर्ण नए कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।

पश्चिम दिशा में रहेगा दिशाशूल

पंचांग के अनुसार रविवार को पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार दिशाशूल वाले दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि किसी कारण से पश्चिम दिशा की ओर यात्रा करना जरूरी हो, तो परंपरागत ज्योतिषीय उपाय अपनाकर यात्रा शुरू करने की मान्यता है।

30 अगस्त का पंचांग एक नजर में

वार रविवार

माह भाद्रपद

पक्ष कृष्ण पक्ष

द्वितीया तिथि सुबह 9 बजकर 37 मिनट तक

इसके बाद तृतीया तिथि

सूर्योदय सुबह 6 बजकर 12 मिनट

सूर्यास्त शाम 6 बजकर 42 मिनट

चंद्रोदय रात 8 बजकर 1 मिनट

चंद्रास्त अगले दिन सुबह 8 बजकर 49 मिनट

सूर्य नक्षत्र मघा

चंद्र नक्षत्र उत्तर भाद्रपद, इसके बाद रेवती

सूर्य राशि सिंह

चंद्र राशि मीन

योग शूल

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अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 2 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक

अमृत काल रात 11 बजकर 8 मिनट से 12 बजकर 44 मिनट तक

राहुकाल शाम 5 बजकर 9 मिनट से 6 बजकर 42 मिनट तक

गुलिक काल दोपहर 3 बजकर 35 मिनट से शाम 5 बजकर 9 मिनट तक

यमगंड काल दोपहर 12 बजकर 27 मिनट से 2 बजकर 1 मिनट तक

दिशाशूल पश्चिम दिशा

सूर्य उपासना और श्रीकृष्ण आराधना के लिए शुभ अवसर

भाद्रपद माह और रविवार का संयोग धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। ऐसे में श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित कर सकते हैं और भगवान विष्णु तथा श्रीकृष्ण की पूजा कर सकते हैं। दिन में शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए धार्मिक कार्य किए जा सकते हैं। हालांकि पंचांग के शुभ अशुभ समय स्थानीय सूर्योदय और स्थान के अनुसार कुछ अंतर के साथ बदल सकते हैं, इसलिए किसी विशेष मांगलिक कार्य के लिए स्थानीय पंचांग का मिलान करना उचित रहेगा।

 

 


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