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कजरी तीज पर शिव-पार्वती की पूजा से मिलेगा अखंड सौभाग्य, जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त और राहुकाल

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नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य, यात्रा, पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान या महत्वपूर्ण निर्णय से पहले पंचांग देखकर शुभ और अशुभ समय का विचार किया जाता है। पंचांग हिंदू काल गणना की ऐसी पारंपरिक पद्धति है, जिसमें तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार और सूर्य-चंद्रमा की स्थिति के आधार पर दिन का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व निर्धारित किया जाता है।

कजरी तीज के साथ खास रहेगा सोमवार का दिन

31 अगस्त 2026 सोमवार को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि सुबह 8 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि का आरंभ हो जाएगा। उदया तिथि के आधार पर कजरी तीज का पर्व 31 अगस्त को ही मनाया जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं वैवाहिक सुख, पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कजरी तीज पर माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

सुबह की पहली किरण से रात के चांद तक, 31 अगस्त का पंचांग बताएगा हर शुभ घड़ी

सोमवार को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 12 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 41 मिनट पर होगा। चंद्रोदय रात 8 बजकर 36 मिनट पर होगा और अगले दिन सुबह 9 बजकर 48 मिनट पर चंद्रास्त होगा। कजरी तीज के व्रत में चंद्रमा के दर्शन और पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है।

सूर्य सिंह राशि में और चंद्रमा मीन राशि में रहेगा

पंचांग के अनुसार 31 अगस्त को सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा मीन राशि में रहेगा। सूर्य पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा और चंद्रमा रेवती नक्षत्र में संचार करेगा। ग्रहों और नक्षत्रों की यह स्थिति दिन के धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व को प्रभावित करेगी।

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गंड योग में बीतेगा सोमवार

इस दिन हर्षण योग नहीं रहेगा, बल्कि गंड योग का प्रभाव रहेगा। पंचांग में योग का विशेष महत्व होता है और शुभ कार्यों के लिए समय का चयन करते समय इसे भी देखा जाता है। सोमवार को अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 02 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। इसे दिन के प्रमुख शुभ मुहूर्तों में शामिल किया जाता है।

अमृत काल में बनेंगे शुभ कार्यों के अवसर

31 अगस्त की रात अमृत काल रात 1 बजे से 2 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में अमृत काल को शुभ समय माना जाता है। हालांकि किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान या महत्वपूर्ण कार्य के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त का विचार करना उचित माना जाता है।

राहुकाल समेत इन अशुभ समयों में नए काम से बचें

सोमवार को राहुकाल सुबह 7 बजकर 46 मिनट से 9 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। वहीं गुलिक काल दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। यमगंड काल सुबह 10 बजकर 53 मिनट से दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा।

पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड जैसे समय में नए और महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि नियमित और पहले से चल रहे कार्यों को लेकर अलग-अलग परंपराओं में अलग मान्यताएं हैं।

पूर्व दिशा में रहेगा दिशाशूल, यात्रा से पहले रखें विशेष ध्यान

पंचांग के अनुसार सोमवार को पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक इस दिन पूर्व दिशा की ओर यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि किसी कारण से इस दिशा में यात्रा करना जरूरी हो, तो परंपरागत ज्योतिषीय उपायों का पालन करके प्रस्थान करने की मान्यता है।

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31 अगस्त 2026 का प्रमुख पंचांग एक नजर में

वार सोमवार

माह भाद्रपद

पक्ष कृष्ण पक्ष

तृतीया तिथि सुबह 8 बजकर 51 मिनट तक

इसके बाद चतुर्थी तिथि

पर्व कजरी तीज

सूर्योदय सुबह 6 बजकर 12 मिनट

सूर्यास्त शाम 6 बजकर 41 मिनट

चंद्रोदय रात 8 बजकर 36 मिनट

चंद्रास्त अगले दिन सुबह 9 बजकर 48 मिनट

सूर्य राशि सिंह

चंद्र राशि मीन

सूर्य नक्षत्र पूर्वाफाल्गुनी

चंद्र नक्षत्र रेवती

योग गंड

अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 02 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक

अमृत काल रात 1 बजे से 2 बजकर 35 मिनट तक

राहुकाल सुबह 7 बजकर 46 मिनट से 9 बजकर 19 मिनट तक

गुलिक काल दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 34 मिनट तक

यमगंड काल सुबह 10 बजकर 53 मिनट से दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक

दिशाशूल पूर्व दिशा

धार्मिक आस्था और पंचांग की मान्यताओं के अनुसार करें दिन की शुरुआत

कजरी तीज के कारण 31 अगस्त का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष रहेगा। महिलाएं इस दिन व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर सकती हैं। वहीं, शुभ कार्यों के लिए अभिजित मुहूर्त जैसे अनुकूल समय का उपयोग करने और राहुकाल, यमगंड तथा गुलिक काल जैसे समयों में नए कार्य शुरू करने से बचने की पारंपरिक मान्यता है। पंचांग के इन विवरणों को धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

 


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