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अंकित बालियान हत्याकांड पर सियासी घमासान तेज, ओमप्रकाश राजभर का अखिलेश यादव पर हमला, बोले- बेटे की लाश पर ‘जाट’ लिखकर राजनीति संवेदना नहीं सौदागरी

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लखनऊ। शामली के चर्चित हरियाणवी गायक और यूट्यूबर अंकित बालियान की हत्या को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत में बयानबाजी तेज हो गई है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने आरोप लगाया कि अंकित बालियान की हत्या को लेकर अखिलेश यादव राजनीति कर रहे थे, जबकि पुलिस कार्रवाई में हत्या के आरोपियों को मुठभेड़ में मार गिराया गया।

राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अखिलेश यादव को निशाने पर लेते हुए कहा कि जिस अंकित बालियान की हत्या पर वह राजनीति करना चाहते थे, उसके हत्यारे अब वहां पहुंच गए हैं, जहां उनकी जगह थी। उन्होंने कहा कि किसी बेटे की लाश पर ‘जाट’ लिखकर राजनीति करना संवेदना नहीं बल्कि सौदागरी है।

‘हत्या मानवता के खिलाफ अपराध, किसी गोत्र की जागीर नहीं’

ओमप्रकाश राजभर ने अपने पोस्ट में कहा कि हत्या मानवता के खिलाफ अपराध है और इसे किसी गोत्र की जागीर के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने अखिलेश यादव पर जातीय राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव नजदीक आने पर उन्हें जाट समाज की याद आई है।

राजभर ने यह भी कहा कि जनता सब कुछ देख रही है। उन्होंने अपने बयान में जाति की राजनीति के साथ साथ प्रदेश में पुलिस और कानून व्यवस्था के राज का भी जिक्र किया।

अंकित हत्याकांड में दो शूटर मारे गए

अंकित बालियान हत्याकांड में पुलिस और उत्तर प्रदेश एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में दो कथित शूटर मुठभेड़ में मारे गए हैं। पुलिस के अनुसार, दोनों पर 50 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था और वे हत्याकांड में प्रमुख शूटर बताए जा रहे थे।

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पुलिस की इस कार्रवाई के बाद अंकित के परिवार की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई थी। परिवार ने कहा कि कार्रवाई से उन्हें आधा इंसाफ मिला है और अब बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी और कार्रवाई की उम्मीद है।

इसी कार्रवाई को लेकर अब सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

अखिलेश यादव ने कानून व्यवस्था पर उठाए थे सवाल

अंकित बालियान की हत्या के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा था कि शामली में अंकित बालियान की 18 राउंड गोलियां चलाकर हत्या किए जाने से पूरे क्षेत्र में भय का माहौल है।

अखिलेश यादव ने मृतक की मां द्वारा बेटे के शव को गोद में रखकर सड़क पर शोक जताने को हृदयविदारक बताया था। उन्होंने कहा था कि जाट समाज ने हमलावरों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर सड़क पर अपनी आवाज उठाई है और प्रदेश का जाट समुदाय इस घटना को अपने ऊपर प्रहार के तौर पर देख रहा है।

अखिलेश ने हत्याकांड की जांच राजनीतिक प्रतिद्वंदिता के दृष्टिकोण से किए जाने की मांग उठने का भी जिक्र किया था और घटना को बेहद निंदनीय बताया था।

राजभर ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर भी साधा निशाना

ओमप्रकाश राजभर ने अपने ताजा बयान से पहले भी अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कांग्रेस और राहुल गांधी के साथ उनके राजनीतिक रिश्तों को लेकर टिप्पणी की थी।

राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव और राहुल गांधी के बीच खटपट शुरू हो गई है और दोनों की राजनीतिक जोड़ी टूटने की स्थिति में है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस नेतृत्व को उत्तर प्रदेश में सरकार बनने की संभावना को लेकर भरोसा नहीं है और इसी वजह से वह अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की कोशिश कर रहा है।

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सपा और कांग्रेस के रिश्तों पर भी कसा तंज

राजभर ने कांग्रेस नेताओं के पुराने राजनीतिक संबंधों का हवाला देते हुए अखिलेश यादव पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि जो कांग्रेस नेता कभी उनके पिता और चाचा के समय दरबार लगाया करते थे, वे आज उन्हें ही आंख दिखाने लगे हैं।

उन्होंने आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह को लेकर भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा और संभावित राजनीतिक गठजोड़ तथा सीट बंटवारे को लेकर सवाल उठाए। राजभर ने कांग्रेस को सीट देने की चर्चा का जिक्र करते हुए पूछा कि अगर कांग्रेस के साथ सीटों को लेकर इतनी चर्चा हो रही है तो आम आदमी पार्टी को कितनी सीटें दी जाएंगी।

अंकित की हत्या के बाद लगातार जारी है सियासी बयानबाजी

अंकित बालियान की हत्या ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। हत्या के बाद विपक्षी दलों ने कानून व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठाए, जबकि सत्ता पक्ष की ओर से पुलिस कार्रवाई को अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख के तौर पर पेश किया जा रहा है।

अब दो कथित शूटरों के मारे जाने के बाद इस हत्याकांड को लेकर राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं। पुलिस के सामने जहां हत्याकांड की पूरी साजिश और बाकी आरोपियों तक पहुंचने की चुनौती है, वहीं राजनीतिक दल इस घटना को लेकर एक दूसरे पर निशाना साध रहे हैं।

 


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