मुंबई। महाराष्ट्र में जन्माष्टमी के अवसर पर शनिवार को आयोजित दही हांडी उत्सव के दौरान इस बार भी बड़ी संख्या में गोविंदा हादसों का शिकार हुए। मुंबई में दही हांडी फोड़ने के प्रयास के दौरान कुल 376 गोविंदाओं के घायल होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, मुंबई में एक बच्चे और पुणे में एक व्यक्ति की मौत होने की खबर है।
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की ओर से रविवार सुबह 8 बजे तक उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, दही हांडी उत्सव के दौरान घायल हुए गोविंदाओं का अलग-अलग सरकारी और बीएमसी अस्पतालों में इलाज कराया गया। इनमें से 53 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि 37 का इलाज जारी था और 286 लोगों को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।
मध्य मुंबई में सबसे ज्यादा 183 गोविंदा घायल
बीएमसी के आंकड़ों के अनुसार, मुंबई के तीनों क्षेत्रों में मध्य मुंबई में सबसे अधिक घायल गोविंदाओं की जानकारी सामने आई। मध्य मुंबई के विभिन्न अस्पतालों में कुल 183 घायल गोविंदाओं की सूचना मिली।
इनमें से 29 लोगों को अस्पताल में भर्ती किया गया था, जबकि 23 का उपचार जारी था। वहीं, 131 घायल गोविंदाओं को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी।
पश्चिमी उपनगरों में 126 लोग घायल
पश्चिमी उपनगरों के अस्पतालों से कुल 126 घायल गोविंदाओं की जानकारी बीएमसी को मिली। इनमें से नौ लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जबकि 14 लोगों का उपचार चल रहा था। उपचार पूरा होने के बाद 103 गोविंदाओं को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी।
पूर्वी उपनगरों में 62 गोविंदाओं को लगी चोट
पूर्वी उपनगरों के विभिन्न अस्पतालों में दही हांडी उत्सव के दौरान घायल हुए 62 गोविंदाओं की जानकारी सामने आई। इनमें से 11 को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जबकि 51 को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।
बीएमसी की ओर से जारी अपडेट के समय पूर्वी उपनगरों में किसी भी मरीज के इलाजरत होने की जानकारी नहीं थी।
केईएम अस्पताल में सबसे ज्यादा 76 घायल
बीएमसी की रिपोर्ट के मुताबिक, अलग-अलग अस्पतालों में केईएम अस्पताल में दही हांडी उत्सव के दौरान घायल गोविंदाओं की संख्या सबसे अधिक रही। यहां कुल 76 घायल गोविंदाओं के मामले दर्ज किए गए।
इनमें से 18 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जबकि 58 को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। अपडेट के समय किसी भी मरीज का इलाज जारी नहीं था।
राजावाड़ी अस्पताल में 33 मामले, 15 भर्ती
राजावाड़ी अस्पताल में कुल 33 घायल गोविंदाओं के पहुंचने की जानकारी मिली। इनमें से 15 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि 18 मरीजों को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।
दही हांडी के दौरान मानव पिरामिड बनाकर ऊंचाई पर बंधी हांडी फोड़ने की कोशिश में कई गोविंदा संतुलन बिगड़ने के कारण नीचे गिरकर घायल हुए।
एचबीटी ट्रॉमा अस्पताल में 34 घायल
एचबीटी ट्रॉमा अस्पताल में दही हांडी उत्सव से जुड़े 34 घायल गोविंदाओं के मामले दर्ज किए गए। इनमें से दो लोगों को भर्ती कराया गया, जबकि 32 को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।
ट्रॉमा अस्पताल में पहुंचे मामलों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि उत्सव के दौरान गिरने और चोट लगने की घटनाएं किस स्तर पर हुईं।
नायर और सायन अस्पताल में भी पहुंचे घायल
नायर अस्पताल में कुल 32 घायल गोविंदाओं के पहुंचने की जानकारी मिली। इनमें से तीन को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि 29 को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।
वहीं, सायन अस्पताल में दही हांडी उत्सव के दौरान घायल हुए 18 लोगों को लाया गया। इनमें चार को भर्ती कराया गया, आठ का इलाज जारी था और छह लोगों को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।
बीडीबीए अस्पताल में 18 मामले, वी. देसाई अस्पताल में 33
बीडीबीए अस्पताल में कुल 18 घायल गोविंदाओं की जानकारी सामने आई। इनमें से दो को अस्पताल में भर्ती किया गया, जबकि 16 को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।
वी. देसाई अस्पताल में कुल 33 घायल गोविंदाओं के मामले दर्ज किए गए और बीएमसी के अपडेट के मुताबिक सभी 33 को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी।
मुंबई में बच्चे और पुणे में व्यक्ति की मौत की खबर
दही हांडी उत्सव के दौरान मुंबई में एक बच्चे और पुणे में एक व्यक्ति की मौत होने की खबर भी सामने आई है। हालांकि, बीएमसी की ओर से जारी आंकड़े मुख्य रूप से मुंबई में घायल गोविंदाओं से संबंधित हैं।
दही हांडी महाराष्ट्र में जन्माष्टमी का प्रमुख आकर्षण है। उत्सव के दौरान गोविंदाओं की टोलियां एक-दूसरे के कंधों पर चढ़कर मानव पिरामिड बनाती हैं और ऊंचाई पर लटकाई गई दही हांडी को फोड़ने का प्रयास करती हैं। इसी दौरान संतुलन बिगड़ने, ऊंचाई से गिरने और आपस में टकराने के कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग घायल होते हैं।
इस बार भी मुंबई में सैकड़ों गोविंदाओं के घायल होने से उत्सव के दौरान सुरक्षा और सावधानी को लेकर सवाल उठे हैं। अस्पतालों में भर्ती मरीजों के उपचार और उनकी स्थिति पर संबंधित एजेंसियों की नजर बनी हुई है।



