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मुजफ्फरनगर के 8 गांवों के मृत पशुओं का हड़वाड़ा बना मुसीबत: दुर्गंध और आवारा कुत्तों से परेशान ग्रामीण बोले- “एक हफ्ते में समाधान नहीं तो करेंगे पलायन”

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मुज़फ़्फ़रनगर। मुज़फ़्फ़रनगर के रतनपुरी थाना क्षेत्र के नंगला गांव में आबादी के नजदीक चल रहे हड़वाड़े को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा सामने आया है। गुरुवार सुबह करीब 11 बजे ग्रामीणों ने मीडिया से वार्ता कर बताया कि पिछले चार-पांच साल से हड़वाड़े की समस्या बनी हुई है। आसपास के करीब आठ गांवों से मृत पशु यहां लाए जाने और उनके अवशेष खुले में पड़े रहने के कारण पूरे इलाके में दुर्गंध फैली रहती है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि एक सप्ताह में समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे गांव से पलायन करने को मजबूर होंगे।

पत्रकार वार्ता करते हुए नंगला निवासी मुरसलीन, आमिर, आकिल समेत ग्रामीणों ने बताया कि नंगला, रियावली, भंडवाड़ा, नाहली, पीटलोककर, कल्याणपुर, छोटी मंडावली और टोढ़ा समेत करीब आठ गांवों के मृत पशु इसी हड़वाड़े में लाए जाते हैं। ग्रामीणों का दावा है कि लगातार मृत पशु आने के कारण यहां अवशेषों का ढेर बढ़ता जा रहा है और आबादी के आसपास रहने वाले लोगों को लगातार दुर्गंध झेलनी पड़ रही है।

ग्रामीणों ने हड़वाड़े के ठेकेदार फारुख पुत्र अब्दुलहक निवासी नंगला पर आरोप लगाया कि मृत पशुओं की खाल निकालने के बाद अवशेष खुले में छोड़ दिए जाते हैं। इसके बाद आवारा कुत्ते इन अवशेषों को नोचकर गांव की गलियों और आबादी तक ले आते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इससे गंदगी के साथ दुर्गंध की समस्या और बढ़ जाती है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि हड़वाड़े के आसपास घूमने वाले आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ गया है। उनके मुताबिक राहगीरों पर कुत्तों के हमले की घटनाएं होती रहती हैं और बच्चों, महिलाओं व बुजुर्गों को सबसे ज्यादा खतरा रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें एक तरफ दुर्गंध और गंदगी से जूझना पड़ रहा है तो दूसरी तरफ कुत्तों के हमले का डर बना रहता है।

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समस्या का असर गांव के सामाजिक जीवन पर भी पड़ने का दावा ग्रामीणों ने किया। उन्होंने बताया कि कई बार दुर्गंध इतनी तेज होती है कि घरों में रहना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों के अनुसार नई शादी होकर आने वाली नवविवाहिताएं भी इस माहौल में रहने से परहेज करती हैं, जबकि रिश्तेदार और मेहमान गांव आने के बाद ज्यादा देर रुकना पसंद नहीं करते।

ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले चार-पांच साल से DM, एसडीएम, पटवारी और अन्य अधिकारियों से शिकायत कर रहे हैं। रतनपुरी थाने में भी शिकायतें देने का दावा किया गया है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने ठेकेदार पर शिकायत करने पर गाली-गलौज और धमकी देने का भी आरोप लगाया है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

ग्रामीणों ने DM के नाम ज्ञापन देकर हड़वाड़े की व्यवस्था की जांच, आबादी के पास मृत पशुओं के अवशेष खुले में डालने पर रोक और मृत पशुओं के निस्तारण की उचित व्यवस्था कराने की मांग की है। उनका कहना है कि हड़वाड़ा आबादी से दूर होना चाहिए, ताकि गांव के लोगों को दुर्गंध और गंदगी की समस्या से राहत मिल सके।

ग्रामीणों ने प्रशासन को एक सप्ताह का समय देते हुए कहा कि यदि इस अवधि में समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे गांव से पलायन करने का फैसला लेने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि वे प्रशासन से टकराव नहीं चाहते, बल्कि लंबे समय से चली आ रही समस्या का स्थायी समाधान चाहते हैं।

प्रेस वार्ता में मुरसलीन, आमिर, आकिल, आदिल, अब्दुल अफान, हसरत, अय्यूब, मेहरबान, शुऐब और इनाम समेत दर्जनभर ग्रामीण मौजूद रहे।

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