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जापान से धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा संदेश, बोले- कागज पर नहीं विचारों में होना चाहिए हिंदू राष्ट्र

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नई दिल्ली। जापान दौरे पर पहुंचे बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने भारत में हिंदू राष्ट्र की अपनी अवधारणा को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वह भारत में हिंदू राष्ट्र कागजों पर नहीं, बल्कि लोगों के विचारों में चाहते हैं। उन्होंने कहा कि विचारों में परिवर्तन से कार्यों में बदलाव आएगा और कार्यों में बदलाव से राष्ट्र का परिवर्तन होगा।

धीरेंद्र शास्त्री ने बातचीत के दौरान हिंदू समाज की चुनौतियों, युवाओं और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव, भारत और जापान की संस्कृति, आध्यात्मिकता और देश में शिक्षा तथा स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की जरूरत को लेकर भी अपनी बात रखी।

कागजों पर नहीं, विचारों में हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना

हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को संविधान के खिलाफ बताए जाने से जुड़े सवाल पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि उनकी परिकल्पना कागजी नहीं, बल्कि वैचारिक है।

उन्होंने कहा कि भारत में हिंदू राष्ट्र कागजों पर नहीं, विचारों में होना चाहिए। उनके मुताबिक विचार परिवर्तन से कार्य परिवर्तन होगा और विचार परिवर्तन से राष्ट्र परिवर्तन होगा। उन्होंने अपनी हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना को वैचारिक बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य लोगों के विचारों में परिवर्तन लाना है।

बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक भारतीय संस्कृति पहुंचाने पर जोर

हिंदू राष्ट्र बनाने में आने वाली समस्याओं के सवाल पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि उनके अनुसार सबसे महत्वपूर्ण बात बच्चों, बुजुर्गों और प्रत्येक भारतीय के दिल में भारतीय परंपरा और सनातन संस्कृति के संस्कारों को मजबूत करना है।

उन्होंने कहा कि समाज में संस्कार, विचार, प्रज्ञा और बुद्धिमत्ता का विकास होना चाहिए। उनके अनुसार यदि भारतीय परंपरा और संस्कृति की व्यापक स्वीकार्यता बनती है तो समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

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जातिवाद और क्षेत्रवाद को बताया बड़ी चुनौती

हिंदू समाज की सबसे बड़ी समस्या के बारे में पूछे जाने पर धीरेंद्र शास्त्री ने क्षेत्रवाद और जातिवाद को प्रमुख चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि इसके बाद प्रदेशवाद भी समाज को प्रभावित करता है।

उनके मुताबिक समाज को इन विभाजनों से ऊपर उठकर व्यापक राष्ट्रीय सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने सामाजिक एकता और भारतीयता की भावना को मजबूत करने पर जोर दिया।

सोशल मीडिया का इस्तेमाल करें, लेकिन सदुपयोग के लिए

जनरेशन जी यानी जेन जी के बीच इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर धीरेंद्र शास्त्री ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की बात कही।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया चलाना अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन उसका सदुपयोग होना चाहिए। अच्छे संस्कार सीखने, उपयोगी जानकारी हासिल करने और सकारात्मक चीजों के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि इसका दुरुपयोग नुकसानदायक हो सकता है।

उन्होंने युवाओं को स्क्रीन टाइम कम करने और रील की बजाय वास्तविक जीवन को प्राथमिकता देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि केवल वायरल होने की चाहत युवाओं पर हावी नहीं होनी चाहिए।

रील से ज्यादा रियल पर भरोसा करने की सलाह

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि जीवन में केवल भागदौड़ जरूरी नहीं है, बल्कि धैर्य और खुशी भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अत्यधिक समय बिताने से बचने की सलाह देते हुए कहा कि रील और इंस्टाग्राम चलाना बुरा नहीं है, लेकिन उसका अत्यधिक इस्तेमाल और दुरुपयोग ठीक नहीं है।

उन्होंने युवाओं से वास्तविक जीवन के अनुभवों, रिश्तों और उपलब्धियों को सोशल मीडिया की आभासी दुनिया से अधिक महत्व देने की अपील की।

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जापान से नियम, सिस्टम और तकनीक सीख सकता है भारत

भारत को जापान से क्या सीखना चाहिए, इस सवाल पर धीरेंद्र शास्त्री ने जापान की संस्कृति, नियम-पद्धति और सिस्टम की तारीफ की।

उन्होंने जापान के मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, लोगों की जीवनशैली, स्वास्थ्य के प्रति सजगता और लंबी आयु से जुड़ी जीवन पद्धति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जापान के लोग अपने शरीर और स्वास्थ्य को लेकर भी काफी सतर्क रहते हैं।

उन्होंने जापान की सामाजिक व्यवस्था की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि वहां क्षेत्रवाद और जातिवाद की तुलना में राष्ट्रवाद की भावना अधिक दिखाई देती है।

जापान भारत से सीखे अनेकता में एकता और आध्यात्मिकता

जापान भारत से क्या सीख सकता है, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि जापान को भारत से युवाओं की संस्कृति को बढ़ावा देने और अनेकता में एकता की भावना सीखनी चाहिए।

उन्होंने भारत की आध्यात्मिक परंपरा को भी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक जापान के लिए भारत से सीखने योग्य चीजों में आध्यात्मिकता एक प्रमुख विषय है।

भगवान को देखने से ज्यादा अनुभव करने की जरूरत

नई पीढ़ी के उस सवाल पर कि बिना प्रमाण के भगवान पर विश्वास क्यों किया जाए, धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि दुनिया में हर चीज प्रमाण के रूप में दिखाई नहीं देती।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हवा दिखाई नहीं देती, लेकिन उसका अस्तित्व है। इसी तरह परमात्मा दिखाई नहीं देते, लेकिन उनकी अनुभूति की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि परमात्मा केवल देखने का विषय नहीं बल्कि अनुभव का विषय हैं और यह अनुभव व्यक्ति को अपने भीतर करना होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी चीज का दिखाई न देना उसके अस्तित्व को नकारने का आधार नहीं हो सकता।

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जापान की तकनीक और विनम्रता से प्रभावित हुए धीरेंद्र शास्त्री

जापान यात्रा के अनुभव को साझा करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भारत उनके लिए सर्वोपरि है और इसमें कोई संदेह नहीं है। हालांकि जापान आकर उन्हें वहां की तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर और लोगों की सोच अच्छी लगी।

उन्होंने जापान के लोगों को सरल, विनम्र और नियमों का पालन करने वाला बताया। उन्होंने जापान, जापान सरकार और वहां के निवासियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

भारत को बदलना है तो शिक्षा और स्वास्थ्य पर काम जरूरी

यदि भगवान हनुमान से भारत को बदलने के लिए कुछ मांगने का अवसर मिले तो वह क्या मांगेंगे, इस सवाल पर धीरेंद्र शास्त्री ने शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार को अपनी प्राथमिकता बताया।

उन्होंने संकेत दिया कि देश के विकास और समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र को मजबूत करना बेहद जरूरी है। उनके अनुसार इन दोनों क्षेत्रों में सुधार से देश के भविष्य पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

भारत और जापान के बीच सीखने की संभावनाएं

धीरेंद्र शास्त्री की बातचीत में भारत और जापान की खूबियों को लेकर एक तुलनात्मक दृष्टिकोण भी सामने आया। उन्होंने जहां जापान की तकनीक, नियम व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की सराहना की, वहीं भारत की विविधता, आध्यात्मिकता और युवाओं की ऊर्जा को उसकी बड़ी ताकत बताया।

उनकी बातों में भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा को आधुनिक विकास के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिखाई दिया। उन्होंने युवाओं से आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए अपनी संस्कृति, संस्कार और वास्तविक जीवन से जुड़े रहने की अपील की।

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