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मायावती की ‘जेन जी’ को नसीहत, बोलीं सत्ता और विपक्ष के कथित खेल से दूर रहें युवा, अपने मुद्दों पर खुद लड़ें

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लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने देश में चल रहे छात्र और युवा आंदोलनों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने खास तौर पर देश के युवाओं और जेन जी से अपील की कि वे अपनी समस्याओं और अधिकारों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज जरूर उठाएं, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल के हाथों का मोहरा न बनें। मायावती ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों छात्र और युवाओं की समस्याओं की आड़ में अपने राजनीतिक स्वार्थ साधने में लगे हुए हैं।

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मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में मायावती ने कहा कि देश का युवा आज पढ़ाई, रोजगार, सरकारी भर्तियों, पेपर लीक और अपने भविष्य को लेकर गंभीर चिंता में है। ऐसे समय में राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी युवाओं की समस्याओं का समाधान करना है, न कि उनके आंदोलनों को अपने राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना।

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‘युवा अपने मुद्दों पर आंदोलन करें, किसी का मोहरा न बनें’

मायावती ने कहा कि छात्र और युवा अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जरूर करें, लेकिन उन्हें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के हित में इस्तेमाल न हो। उन्होंने कहा कि आंदोलन का वास्तविक उद्देश्य युवाओं की समस्याओं का समाधान होना चाहिए।

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बसपा प्रमुख ने कहा कि युवाओं को अपने मुद्दों के लिए स्वयं संघर्ष करना चाहिए और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज सरकार तक पहुंचानी चाहिए। किसी राजनीतिक दल की रणनीति का हिस्सा बनने के बजाय युवाओं को अपने हितों और भविष्य को केंद्र में रखकर आंदोलन करना चाहिए।

संसद में हंगामे को लेकर सत्ता और विपक्ष पर हमला

मायावती ने पिछले कुछ समय से संसद में विभिन्न मुद्दों को लेकर हो रहे हंगामे पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष, खासकर भाजपा, कांग्रेस और उनके सहयोगी दल किसी न किसी मुद्दे पर संसद में लगातार हंगामा कर रहे हैं।

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उन्होंने कहा कि इस राजनीतिक टकराव के बीच जनहित से जुड़े जरूरी मुद्दे पीछे छूट रहे हैं। मायावती ने आशंका जताई कि केंद्र और राज्यों में अपनी सरकारों की कमियों से जनता का ध्यान हटाने के लिए सत्ता और विपक्ष के बीच किसी तरह का अंदरूनी समझौता भी हो सकता है।

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उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों की आपसी लड़ाई का सबसे ज्यादा नुकसान आम जनता और युवाओं को उठाना पड़ता है, क्योंकि उनके वास्तविक सवाल राजनीतिक शोर में दब जाते हैं।

जंतर मंतर के छात्र आंदोलन का किया जिक्र

मायावती ने दिल्ली के जंतर मंतर पर पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर हुए छात्र और युवा आंदोलन का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने इस आंदोलन को अपने राजनीतिक हित में इस्तेमाल करने की कोशिश की।

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उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं की समस्याएं वास्तविक और गंभीर हैं। बसपा हमेशा उनके साथ खड़ी रही है और आगे भी युवाओं के अधिकारों तथा रोजगार से जुड़े मुद्दों को उठाती रहेगी।

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मायावती ने कहा कि किसी भी आंदोलन को राजनीतिक दलों के फायदे का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने आंदोलन की दिशा और मुद्दों पर खुद नियंत्रण रखें।

रांची के आंदोलन को लेकर भी साधा निशाना

बसपा प्रमुख ने झारखंड की राजधानी रांची में चल रहे छात्र और युवा आंदोलन का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां कांग्रेस और उसके सहयोगी दल छात्रों की समस्याओं को लेकर खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं, जबकि भाजपा और उसके समर्थक दल आंदोलन के समर्थन में आगे आ रहे हैं।

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मायावती ने कहा कि दिल्ली और रांची दोनों जगहों पर छात्र और युवा आंदोलनों में उनकी समस्याओं के समाधान से ज्यादा राजनीतिक स्वार्थ दिखाई दे रहा है। उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से कहा कि युवाओं की समस्याओं को राजनीतिक लाभ और नुकसान से ऊपर रखते हुए उनके समाधान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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सरकारी नौकरियों में आरक्षण को लेकर जताई चिंता

मायावती ने सरकारी नौकरियों में आरक्षण के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ लगातार सीमित होता जा रहा है और इसे निष्प्रभावी करने की कोशिशें की जा रही हैं।

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उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र को कमजोर किया जा रहा है और निजी क्षेत्र को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका असर गरीबों, बेरोजगारों और वंचित वर्गों पर पड़ रहा है। उनके अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र में रोजगार के अवसर कम होने से आरक्षण का वास्तविक लाभ भी प्रभावित हो रहा है।

‘निजी क्षेत्र में भी आरक्षण लागू होना चाहिए’

मायावती ने कहा कि बसपा निजी क्षेत्र के खिलाफ नहीं है। पार्टी निजी क्षेत्र के विकास के पक्ष में है, लेकिन जिस प्रकार सरकारी नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था लागू है, उसी तरह निजी क्षेत्र में भी आरक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए।

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उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र के विस्तार के साथ रोजगार के बड़े अवसर पैदा हो रहे हैं। ऐसे में समाज के वंचित वर्गों को भी इन अवसरों में उचित हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।

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मायावती ने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था में बड़े पूंजीपति लगातार मजबूत हो रहे हैं, जबकि गरीब, बेरोजगार और वंचित वर्ग पीछे छूटते जा रहे हैं।

‘बसपा सरकारों में सभी वर्गों का रखा गया ध्यान’

बसपा प्रमुख ने उत्तर प्रदेश में अपनी पार्टी की पूर्व सरकारों का जिक्र करते हुए कहा कि बसपा की चार सरकारों के दौरान सर्वसमाज के सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखा गया और किसी के साथ भेदभाव नहीं किया गया।

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उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकारों में छात्रों की समस्याओं के समाधान के साथ युवाओं की ‘रोटी और रोजी’ का भी विशेष ध्यान रखा गया। मायावती ने कहा कि रोजगार और शिक्षा से जुड़े सवाल उनकी पार्टी की प्राथमिकताओं में हमेशा रहे हैं।

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यूपी, उत्तराखंड और पंजाब चुनाव को लेकर कार्यकर्ताओं से अपील

मायावती ने आगामी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब विधानसभा चुनावों का भी जिक्र किया। उन्होंने सर्वसमाज के लोगों से बसपा को मजबूत करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि दलित, आदिवासी, पिछड़े, मुस्लिम, किसान, मजदूर, व्यापारी, कर्मचारी, छात्र, युवा और अन्य मेहनतकश वर्गों के हितों की रक्षा के लिए बसपा को सत्ता में लाना जरूरी है।

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मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी सर्वसमाज के हितों को ध्यान में रखकर राजनीति करती है और आने वाले चुनावों में इन वर्गों को संगठित करने का प्रयास करेगी।

युवाओं के मुद्दों पर सियासी घमासान तेज होने के आसार

मायावती के बयान से साफ है कि बसपा आने वाले समय में छात्र, युवा, रोजगार, आरक्षण और शिक्षा जैसे मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को घेरने की रणनीति पर आगे बढ़ सकती है।

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उन्होंने एक ओर युवाओं को राजनीतिक दलों के कथित प्रभाव से दूर रहने की सलाह दी है, वहीं दूसरी ओर भाजपा और कांग्रेस समेत अन्य दलों पर छात्र आंदोलनों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। ऐसे में आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले युवाओं के मुद्दे उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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