Home » उत्तर प्रदेश » जेन-जी आंदोलन पर मायावती का बड़ा हमला, बोलीं- राजनीतिक दलों ने किया हाईजैक; कार्यकर्ताओं को आंदोलन से दूर रहने का निर्देश

जेन-जी आंदोलन पर मायावती का बड़ा हमला, बोलीं- राजनीतिक दलों ने किया हाईजैक; कार्यकर्ताओं को आंदोलन से दूर रहने का निर्देश

Facebook
Twitter
WhatsApp

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने जेन-जी और जेन-अल्फा की मांगों को लेकर चल रहे आंदोलनों पर चिंता जताते हुए राजनीतिक दलों पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं और बेरोजगारों की ज्वलंत समस्याओं को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब विभिन्न राजनीतिक पार्टियों द्वारा ‘हाईजैक’ किए जाने के कारण स्वतंत्र कम और राजनीतिक ज्यादा नजर आ रहा है।

मायावती ने कहा कि आंदोलन के राजनीतिक रंग लेने से युवाओं और छात्रों के सामने रखे गए बड़े-बड़े सपनों को लेकर गंभीर शंकाएं पैदा हो रही हैं। उन्होंने रविवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर सिलसिलेवार पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी।

जेन-जी और जेन-अल्फा की मांगों से बसपा को सहानुभूति

बसपा प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी को जेन-जी और जेन-अल्फा की जरूरी मांगों के प्रति पूरी सहानुभूति और चिंता है। उन्होंने कहा कि युवाओं की समस्याओं का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए और इसके लिए पार्टी की राज्य इकाइयों को सक्रिय भूमिका निभाने का निर्देश दिया गया है।

मायावती ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से कहा कि वे अपने-अपने राज्यों और क्षेत्रों में संबंधित अधिकारियों से मुलाकात करें और युवाओं से जुड़े मुद्दों का शांतिपूर्ण समाधान कराने का प्रयास करें।

‘आंदोलन स्वतंत्र कम, राजनीतिक ज्यादा नजर आ रहा’

मायावती ने जेन-जी के आंदोलन के राजनीतिक स्वरूप पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं, जिनके आधार पर लोगों को यह महसूस हो रहा है कि युवाओं और बेरोजगारों की समस्याओं को लेकर शुरू किए गए आंदोलनों को अलग-अलग राजनीतिक दलों ने अपने हित में इस्तेमाल किया है।

ALSO READ THIS :  मेरठ में साजिश का खौफनाक खुलासा, पत्नी ने प्रेमी संग मिलकर करैत सांप से डसवाकर कराई पति की हत्या

उन्होंने जंतर-मंतर आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां युवाओं और छात्रों को बड़े-बड़े सपने दिखाए गए थे। लेकिन अब आंदोलन का स्वरूप स्वतंत्र कम और राजनीतिक ज्यादा दिखाई देने लगा है। उन्होंने कहा कि इससे आंदोलन के मूल उद्देश्य और युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर शंकाएं पैदा होती हैं।

बसपा राज्य इकाइयों को अधिकारियों से मिलने के निर्देश

बसपा प्रमुख ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी युवाओं की मांगों और समस्याओं से खुद को अलग नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी की सभी राज्य इकाइयां संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर युवाओं की समस्याओं का समाधान कराने की दिशा में काम करेंगी।

मायावती ने कहा कि बातचीत और संवैधानिक तरीके से समस्याओं का समाधान निकालना जरूरी है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को किसी भी तरह के धरना, प्रदर्शन या आंदोलन में शामिल नहीं होने का निर्देश दिया।

‘बसपा कार्यकर्ता धरना-प्रदर्शन नहीं करेंगे’

मायावती ने कहा कि बसपा अपने अनुशासन के अनुसार धरना, प्रदर्शन और आंदोलन की राजनीति से दूर रहेगी। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपनी ऊर्जा और संसाधनों को आगामी चुनाव की तैयारियों के लिए सुरक्षित रखने को कहा।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि उनकी तन, मन और धन की शक्ति तथा ऊर्जा चुनावी लक्ष्य के लिए समर्पित रहनी चाहिए। मायावती के मुताबिक पार्टी का मुख्य उद्देश्य चुनाव के जरिए ऐसी सरकार बनाना है, जो सर्वसमाज के हित में काम कर सके।

‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ को बताया लक्ष्य

बसपा प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी का लक्ष्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के सपनों को साकार करने वाली ‘सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की सरकार बनाना है।

ALSO READ THIS :  'सीजेपी का प्रदर्शन सिर्फ जंतर-मंतर तक सीमित', अभिजीत दिपके बोले- उपद्रव करने वालों से हमारा कोई संबंध नहीं

उन्होंने कहा कि ऐसी सरकार बनने पर जेन-जी और जेन-अल्फा सहित समाज के सभी वर्गों की समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जा सकेगा। मायावती ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में बसपा की चार सरकारों के दौरान पार्टी ने इस दिशा में काम करके दिखाया है।

जंतर-मंतर आंदोलन में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल

मायावती ने जेन-जी के जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस ने समय रहते उचित कार्रवाई की होती तो संजय आजाद जैसी गंभीर घटना नहीं होती।

उन्होंने संबंधित मामले के अभियुक्तों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में कानून के तहत कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए और यदि ऐसा नहीं होता है तो बसपा भी ऐसे मामलों को लेकर पीछे नहीं रहेगी।

युवाओं के मुद्दों पर सियासत के बजाय समाधान की जरूरत

मायावती के बयान से साफ है कि बसपा युवाओं और बेरोजगारों की मांगों का समर्थन करने के साथ-साथ आंदोलनों के राजनीतिक इस्तेमाल पर सवाल उठा रही है। उन्होंने एक तरफ पार्टी कार्यकर्ताओं को आंदोलन से दूर रहने का निर्देश दिया है, वहीं दूसरी तरफ राज्य इकाइयों को अधिकारियों से मिलकर युवाओं की समस्याओं का शांतिपूर्ण समाधान कराने की जिम्मेदारी सौंपी है।

बसपा प्रमुख ने युवाओं के मुद्दों को गंभीर बताते हुए कहा कि इन समस्याओं का स्थायी समाधान सत्ता और नीतिगत स्तर पर ही संभव है। इसी उद्देश्य से उन्होंने आगामी चुनाव को पार्टी की प्राथमिकता बताते हुए कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारियों पर ध्यान केंद्रित करने का संदेश दिया।

ALSO READ THIS :  नेपाल: जेन-जेड प्रदर्शनकारियों पर पुलिस हिंसा और सोशल मीडिया बैन से उबलता आक्रोश, जांच समिति गठित, मगर क्या होगा हल?

 

[wonderplugin_slider id=1]

टॉप स्टोरी

ज़रूर पढ़ें