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मुजफ्फरनगर में बाइक भिड़ंत में दो की मौत, कुत्ते के काटने से छात्र की गई जान

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मुजफ्फरनगर। बुढ़ाना कोतवाली क्षेत्र में रविवार देर रात एक भीषण सड़क हादसे में दो बाइकों की जोरदार भिड़ंत ने दो युवकों की जिंदगी छीन ली। इस हादसे में विज्ञाना गांव निवासी जुनैद अहमद (23) और जौला गांव निवासी दुष्यंत कुमार (24) की दर्दनाक मौत हो गई।

हादसा बुढ़ाना-कांधला मार्ग पर एक स्कूल के पास हुआ, जहां तेज रफ्तार में दोनों बाइकें आपस में टकराईं। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों बाइक चालक सड़क पर गिरकर दूर तक घिसट गए और उनकी बाइकें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं।

जुनैद के साथी मुनीर अहमद भी घायल हुए, जिन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया। पुलिस ने दोनों मृतकों के शवों का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। इस हादसे से दोनों गांवों में शोक की लहर है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

 

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हादसे की जांच और अंतिम संस्कार

पुलिस के अनुसार, जुनैद अपने भाई मुनीर के साथ बाइक से बुढ़ाना जा रहा था, जबकि दुष्यंत अपनी दुकान के लिए बर्फ की सिल्ली लेकर घर लौट रहा था। हादसे की सूचना पर बुढ़ाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और घायलों को नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले जाया गया।

वहां जुनैद को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि दुष्यंत ने जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। घायल मुनीर की हालत में सुधार बताया जा रहा है। पुलिस ने दोनों शवों का अंतिम संस्कार धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ करवाया।

 

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आवारा कुत्ते के काटने से छात्र की मौत

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एक अन्य दुखद घटना में, बुढ़ाना कोतवाली क्षेत्र के चंधेडी गांव में 15 वर्षीय छात्र शिवा की हड्डक (रेबीज) के कारण मृत्यु हो गई। शिवा, जो नौवीं कक्षा का छात्र था, को दो महीने पहले एक आवारा पागल कुत्ते ने काट लिया था। उसने इस घटना का कोई इलाज नहीं कराया।

शनिवार को कॉलेज में उसे चक्कर आए और वह बेहोश होकर गिर पड़ा। परिजन उसे तुरंत अस्पताल ले गए, जहां से उसे चंडीगढ़ एम्स रेफर किया गया। रविवार देर रात रास्ते में शिवा की मौत हो गई। सोमवार सुबह सैकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी में उसका अंतिम संस्कार किया गया। इस घटना ने गांव में शोक की लहर फैला दी।

 

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रेबीज की अनदेखी का दुखद परिणाम

शिवा के परिजनों का कहना है कि उसने कुत्ते के काटने की घटना को गंभीरता से नहीं लिया और समय पर रेबीज का टीका नहीं लगवाया गया। ग्रामीणों ने बाद में उस पागल कुत्ते को मार दिया था, लेकिन शिवा की जान नहीं बच सकी।

इस घटना की जानकारी पुलिस को नहीं दी गई। यह मामला आवारा कुत्तों की समस्या और रेबीज जैसी घातक बीमारी के प्रति जागरूकता की कमी को उजागर करता है। मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने हाल ही में खरगोन और देवास में कुत्तों के हमले के मामलों में संज्ञान लिया है, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है।

 

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सड़क और स्वास्थ्य सुरक्षा पर सवाल

इन दोनों घटनाओं ने मुजफ्फरनगर में सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। तेज रफ्तार के कारण होने वाले हादसे और रेबीज जैसी बीमारियों की अनदेखी जानलेवा साबित हो रही है।

प्रशासन को सड़क सुरक्षा नियमों को सख्त करने और आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। साथ ही, रेबीज के प्रति जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता भी महसूस की जा रही है।

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