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111 हरे पेड़ों की कटाई के विरोध में ‘चिपको आंदोलन’ का ऐलान: पेड़ों की कटाई की अनुमति का विरोध, DM से कार्रवाई की मांग, आज से आंदोलन की चेतावनी

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मुज़फ़्फ़रनगर। मुख्यमंत्री के वृक्षारोपण अभियान और पर्यावरण संरक्षण को लेकर चलाए जा रहे अभियानों के बीच बेलड़ा कोठी क्षेत्र में 111 हरे-भरे पेड़ों की कटाई की अनुमति दिए जाने का मामला सामने आया है। पेड़ों की कटाई के विरोध में गुरुवार को किसान सेवक विनीत त्यागी और आंदोलन से जुड़े लोगों ने 24 सितंबर यानी आज से से ‘पेड़ बचाओ, चिपको आंदोलन’ शुरू करने की चेतावनी दी है। उन्होंने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और पेड़ों की कटाई की अनुमति देने की प्रक्रिया की समीक्षा करने की मांग की है।

आंदोलन से जुड़े लोगों के अनुसार बेलड़ा कोठी क्षेत्र के 76 हरे-भरे, छायादार एवं फलदार पेड़ों तथा सिंचाई विभाग की कॉलोनी में लगे 35 पेड़ों को काटे जाने की अनुमति दी गई है। उनका दावा है कि कुल 111 पेड़ों की कटाई से क्षेत्र के पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

किसान सेवक विनीत त्यागी ने जिलाधिकारी मुज़फ़्फ़रनगर को पत्र देकर मामले में जांच की मांग की है। उन्होंने मेरठ क्षेत्र में कोठी गंगा और चिंतोडा झाल के आसपास पूर्व में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई को लेकर उठे सवालों का भी उल्लेख किया। आंदोलनकारियों का कहना है कि एक ओर सरकार वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण को लेकर अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर हरे-भरे पेड़ों की कटाई की अनुमति दिए जाने से सवाल खड़े हो रहे हैं।

आंदोलनकारियों ने कहा कि 24 सितंबर यानी आज से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से ‘पेड़ बचाओ, चिपको आंदोलन’ चलाया जाएगा। उनका कहना है कि 111 पेड़ों की रक्षा के लिए हरसंभव लोकतांत्रिक प्रयास किया जाएगा।

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उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और यह पता लगाने की मांग की है कि पेड़ों की कटाई वास्तव में आवश्यक है या नहीं। साथ ही पेड़ काटने की अनुमति देने की प्रक्रिया की समीक्षा करने तथा पर्यावरणीय नियमों या सरकारी निर्देशों की अनदेखी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

आंदोलन से जुड़े लोगों ने कहा, “पेड़ केवल लकड़ी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की सांस हैं। पेड़ बचेंगे, तभी जीवन बचेगा और प्रकृति बचेगी, तभी भविष्य बचेगा।”

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