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“एक फौजी और पटवारी ने बंद किया कंपनी बाग का रास्ता!” मुजफ्फरनगर DM दफ्तर पर बुजुर्गों का फूटा गुस्सा,दी धरने की चेतावनी

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मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में सुमन विहार सर्कुलर रोड से कमला नेहरू वाटिका (कंपनी बाग) को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग को बंद किए जाने और सरकारी भूमि पर अवैध रूप से पक्का अतिक्रमण करने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस गंभीर समस्या से आक्रोशित सुमन विहार कॉलोनी के दर्जनों बुजुर्गों और स्थानीय निवासियों ने जिलाधिकारी (डीएम) कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि गली में रहने वाले दो प्रभावशाली परिवारों ने दबंगई दिखाते हुए सार्वजनिक रास्ते पर लगा गेट उखाड़ दिया और वहां पक्की दीवार खड़ी करके आम जनता की आवाजाही को पूरी तरह रोक दिया है। ग्रामीणों ने इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम एक ज्ञापन सौंपकर त्वरित कार्रवाई की गुहार लगाई है।

गेट उखाड़कर बना दी पक्की दीवार, बुजुर्गों को स्वास्थ्य लाभ से रोका: सभ्यता चौधरी

कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन के दौरान अग्रिम पंक्ति में खड़ी शिकायतकर्ता महिला सभ्यता चौधरी ने मीडिया के सामने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए सीधे आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि भगत जी स्वीट्स के ठीक सामने से होकर एक रास्ता सीधे कंपनी बाग के भीतर खुलता था, जिससे कॉलोनी के लोगों को आने-जाने में बेहद आसानी होती थी। इस रास्ते पर पहले एक गेट लगा हुआ था, लेकिन कॉलोनी के ही दो परिवारों ने आपसी साठगांठ कर उस गेट को वहां से उखाड़ फेंका और अब पक्का निर्माण कर रास्ता हमेशा के लिए बंद कर दिया है। सभ्यता चौधरी ने कहा कि आज कॉलोनी में बुजुर्गों की संख्या काफी ज्यादा हो गई है, जिन्हें सुबह-शाम टहलने, व्यायाम करने और शुद्ध हवा के लिए कंपनी बाग जाना पड़ता है। रास्ता बंद होने के कारण अब बुजुर्गों को मीलों लंबा चक्कर काटकर कंपनी बाग पहुंचना पड़ रहा है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।

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एक फौजी और एक पटवारी ने किया है सरकारी सड़क पर कब्जा, आवारा कुत्तों का बना डर

प्रदर्शन में शामिल एक अन्य स्थानीय महिला ने अतिक्रमणकारियों का नाम उजागर करते हुए बताया कि इस पूरे विवाद के पीछे एक फौजी और एक पटवारी का हाथ है, जिनके मकान उस रास्ते पर आमने-सामने बने हुए हैं। इन दोनों ने अपनी हठधर्मिता के कारण पूरी सरकारी सड़क को अपने व्यक्तिगत कब्जे में ले लिया है। महिला ने प्रशासनिक उदासीनता पर रोष प्रकट करते हुए कहा कि जब वे लोग मुख्य रास्ता बंद होने के कारण दूसरे लंबे रास्तों से घूमकर कंपनी बाग जाने को मजबूर होते हैं, तो वहां सड़कों पर हर समय दर्जनों खूंखार और आवारा कुत्ते घूमते रहते हैं। इसके अलावा वैकल्पिक रास्तों की सड़कें भी बेहद जर्जर और खराब हालत में हैं। उन्होंने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि हाल ही में वे खुद एक खराब सड़क पर असंतुलित होकर गिर गईं, जिससे उनके पैर में गंभीर चोट आई है।

‘पहले डर दिखाकर हमसे ही करवाए थे हस्ताक्षर, अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं’

इस पूरे मामले पर रोशनी डालते हुए प्रदर्शनकारी नवीन कुमार ने एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि कुछ साल पहले क्षेत्र के ही कुछ रसूखदार लोगों ने कॉलोनी वासियों को सुरक्षा का डर दिखाया था और भय का माहौल पैदा करके जबरन इस रास्ते को बंद करवा दिया था। नवीन कुमार ने स्वीकार किया कि उस समय रास्ता बंद करवाने वाले शिकायती पत्र पर चालाकी से हम लोगों के ही हस्ताक्षर (साइन) करवा लिए गए थे, क्योंकि तब की परिस्थितियां और माहौल बिल्कुल अलग था। लेकिन आज तक सुरक्षा को लेकर ऐसा कोई भी मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि आज क्षेत्र के बुजुर्गों की सेहत को देखते हुए कंपनी बाग जाना बेहद जरूरी हो चुका है, इसलिए हमारी मांग है कि पूर्व में बंद किए गए इस रास्ते को तुरंत बहाल किया जाए।

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कागजों में सिमटा आश्वासन, जमीनी स्तर पर कार्रवाई न होने से स्थानीय लोगों में भारी रोष

नवीन कुमार और अन्य प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अतिक्रमण और रास्ता बंद होने की शिकायत लेकर वे कई बार तहसील और जिला मुख्यालय के चक्कर काट चुके हैं। हर बार प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा उन्हें जल्द से जल्द पैमाइश कराने, सरकारी अभिलेखों की जांच करने और अवैध कब्जे को ढहाने का कोरा आश्वासन तो दे दिया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर आज तक कोई भी ठोस दंडात्मक कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है। बुजुर्गों ने साफ कर दिया है कि यदि जल्द ही पैमाइश कराकर कंपनी बाग का यह रास्ता नहीं खुलवाया गया और फौजी व पटवारी के खिलाफ विधिक कार्रवाई नहीं हुई, तो वे कलेक्ट्रेट परिसर में ही अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने को विवश होंगे।

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