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सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी पर शिवमय हुआ हरिद्वार, दक्षेश्वर महादेव के दर्शन के लिए उमड़ा आस्था का सैलाब

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हरिद्वार। सावन माह के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के शुभ संयोग पर धर्मनगरी हरिद्वार पूरी तरह शिवमय नजर आई। कनखल स्थित प्राचीन दक्षेश्वर महादेव मंदिर में सोमवार सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए भक्त लंबी कतारों में खड़े नजर आए। मंदिर परिसर हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से गूंजता रहा।

सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी का एक साथ पड़ना श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक अवसर माना जा रहा है। सुबह से ही दूर-दूर से श्रद्धालु कनखल पहुंचे और भगवान दक्षेश्वर महादेव के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। भक्तों ने शिवलिंग पर जल अर्पित कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

महादेव को प्रिय है सावन का महीना

दक्षेश्वर महादेव मंदिर के पंडित नितिन बिजलवान ने सावन के महत्व के बारे में बताया कि वैसे तो हर दिन, हर रात और हर क्षण भगवान महादेव का ही है, लेकिन सावन मास महादेव को विशेष रूप से प्रिय माना जाता है। इसी वजह से सावन के महीने में भगवान शिव की आराधना विशेष उत्साह और श्रद्धा के साथ की जाती है।

उन्होंने कहा कि सावन के दौरान शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है और भक्त विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। हरिद्वार में भी सावन के पूरे महीने धार्मिक वातावरण बना रहता है।

दक्षेश्वर महादेव को कहा जाता है महादेव का ससुराल

कनखल स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर का पौराणिक महत्व बेहद खास माना जाता है। मंदिर के पंडित नितिन बिजलवान ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कनखल को भगवान शिव का ससुराल कहा जाता है।

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मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान महादेव का विशेष निवास कनखल में रहता है। यही कारण है कि श्रावण मास में कनखल और हरिद्वार में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है। देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहां पहुंचकर भगवान शिव की पूजा करते हैं।

एक लोटा जल और सच्ची श्रद्धा से करें महादेव की पूजा

भगवान शिव की पूजा की विधि के बारे में पंडित नितिन बिजलवान ने श्रद्धालुओं को सरल संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पूजा की अनेक विधियां हैं, लेकिन भगवान भाव के भूखे हैं।

उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि पूजा की विधियों को लेकर अधिक उलझने की जरूरत नहीं है। सच्चे मन से एक लोटा जल भगवान शिव को अर्पित करना भी श्रद्धा का प्रतीक है। उन्होंने भक्तों से भाव और विश्वास के साथ महादेव की आराधना करने की अपील की।

नाग पंचमी पर नाग-नागिन की पूजा का विशेष महत्व

सावन के तीसरे सोमवार के साथ नाग पंचमी का पर्व होने के कारण मंदिर में विशेष धार्मिक माहौल देखने को मिला। पंडित नितिन बिजलवान ने नाग पंचमी के धार्मिक महत्व को बताते हुए कहा कि इस दिन नाग और नागिन के जोड़े को भगवान महादेव को अर्पित किया जाता है।

शिवलिंग पर नाग और नागिन की पूजा की जाती है। श्रद्धालु उन्हें दूध, अक्षत और फल अर्पित करते हैं। नाग पंचमी केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह जीवों के प्रति दया और उनकी रक्षा का संदेश भी देती है।

नाग पंचमी देती है जीवों की रक्षा का संदेश

पंडित नितिन बिजलवान ने कहा कि भारतीय परंपरा में नागों को भगवान शिव से जोड़कर देखा जाता है। नाग पंचमी के अवसर पर नागों की पूजा के माध्यम से प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान की भावना भी प्रकट होती है।

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उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि पर्व को केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित न रखें, बल्कि जीवों के प्रति दया और उनकी रक्षा का संकल्प भी लें।

मंदिर में व्यवस्था बनाए रखने की अपील

दक्षेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंधन और स्थानीय व्यवस्था की ओर से भी भक्तों से सहयोग की अपील की गई। पंडित नितिन बिजलवान ने कहा कि श्रद्धालु भक्ति भाव से पूजा-पाठ करें और मंदिर की व्यवस्था को बनाए रखने में सहयोग दें।

उन्होंने भक्तों से आग्रह किया कि भीड़ के दौरान धैर्य रखें और ऐसी कोई गतिविधि न करें जिससे मंदिर की व्यवस्था प्रभावित हो।

स्वच्छता को लेकर भी दिया संदेश

मंदिर के पंडित ने श्रद्धालुओं से स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत का संकल्प तभी पूरा होगा जब हर व्यक्ति इसकी शुरुआत स्वयं से करेगा।

उन्होंने कहा कि सावन का महीना हो या वर्ष का कोई भी दिन, लोगों को अपने आसपास साफ-सफाई बनाए रखनी चाहिए। धार्मिक स्थलों की पवित्रता और स्वच्छता बनाए रखना भी श्रद्धालुओं की जिम्मेदारी है।

जयकारों से गूंजता रहा दक्षेश्वर महादेव मंदिर

सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के शुभ अवसर पर दक्षेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था देखते ही बन रही थी। भक्तों की लंबी कतारों के बीच हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारे लगातार गूंजते रहे।

श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। कनखल का पूरा वातावरण शिव भक्ति में डूबा नजर आया। सावन और नाग पंचमी के इस विशेष संयोग ने हरिद्वार की धार्मिक आभा को और भी भव्य बना दिया।

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