Home » उत्तर प्रदेश » यूपी में जननी सुरक्षा योजना का दिख रहा बड़ा असर: संस्थागत प्रसव बढ़ने से मातृ मृत्यु दर में आई भारी गिरावट

यूपी में जननी सुरक्षा योजना का दिख रहा बड़ा असर: संस्थागत प्रसव बढ़ने से मातृ मृत्यु दर में आई भारी गिरावट

Facebook
Twitter
WhatsApp

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने और प्रसव के दौरान मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए चल रही जननी सुरक्षा योजना का असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। योगी सरकार की ओर से सुरक्षित प्रसव को प्रोत्साहित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों के बीच चालू वित्तीय वर्ष में एक अप्रैल से 9 अगस्त तक प्रदेश में 7 लाख से अधिक संस्थागत प्रसव दर्ज किए गए हैं। सरकार का दावा है कि संस्थागत प्रसव में बढ़ोतरी से मातृ मृत्यु दर को कम करने में मदद मिल रही है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक कई जिलों में योजना के बेहतर क्रियान्वयन और लाभार्थियों तक आर्थिक सहायता पहुंचाने का असर सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक कई जिलों में योजना के तहत 80 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों को भुगतान किया जा चुका है।

अस्पताल तक पहुंची माताएं तो घटने लगा मौत का खतरा

जननी सुरक्षा योजना का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को घर पर प्रसव कराने के बजाय सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के लिए प्रोत्साहित करना है। संस्थागत प्रसव होने से गर्भवती महिला और नवजात को प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की निगरानी में उपचार उपलब्ध हो पाता है।

प्रसव के दौरान अचानक होने वाली जटिलताओं की स्थिति में अस्पताल में तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध हो सकती है। जरूरत पड़ने पर दवाओं, रक्त और आपातकालीन सेवाओं की सुविधा भी मिलती है। यही वजह है कि संस्थागत प्रसव को मातृ और नवजात स्वास्थ्य की सुरक्षा से सीधे जोड़कर देखा जा रहा है।

ALSO READ THIS :  मुजफ्फरनगर के शिव चौक पर रेहड़े-पटरी वालों का 'तांड़व'! फड़ लगाने को लेकर दो पक्षों में 'महाभारत', Video वायरल

ग्रामीण महिलाओं को 1400 और शहरी क्षेत्र में 1000 रुपये की सहायता

सचिव स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक डॉ. पिंकी जोवल के मुताबिक जननी सुरक्षा योजना के तहत सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव कराने वाली पात्र गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जाती है।

ग्रामीण क्षेत्र में प्रसव कराने वाली महिला को 1400 रुपये और शहरी क्षेत्र में 1000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। योजना का उद्देश्य प्रसव से जुड़े खर्चों में परिवारों की मदद करना और महिलाओं को सुरक्षित स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित करना है।

सरकार का मानना है कि आर्थिक सहायता मिलने से गरीब और ग्रामीण परिवारों की महिलाओं को अस्पताल में प्रसव कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

पश्चिम से पूरब तक कई जिलों का शानदार प्रदर्शन

जननी सुरक्षा योजना के क्रियान्वयन में प्रदेश के कई जिलों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाथरस, मैनपुरी, फिरोजाबाद, हरदोई, कानपुर देहात, मुजफ्फरनगर और बागपत जैसे जिलों में योजना के तहत लाभार्थियों तक भुगतान पहुंचाने में बेहतर प्रगति दर्ज की गई है।

वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में जौनपुर, अंबेडकरनगर और सोनभद्र जैसे जिलों ने भी योजना के क्रियान्वयन में अच्छा प्रदर्शन किया है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इन जिलों में 80 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों का भुगतान पूरा हो चुका है।

आंकड़े बता रहे योजना की पहुंच का असर

स्वास्थ्य सचिव डॉ. पिंकी जोवल के अनुसार एक अप्रैल से 9 अगस्त तक प्रदेश में कुल 7,17,736 संस्थागत प्रसव हुए। इनमें से 5,43,661 लाभार्थियों को योजना के तहत भुगतान किया जा चुका है।

ALSO READ THIS :  मुजफ्फरनगर में एक और नया किसान संगठन! दीपक सोम ने छोड़ा पुराना ठिकाना, बनाई 'भारतीय किसान यूनियन सेवक'!

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि संस्थागत प्रसव की संख्या और लाभार्थियों तक आर्थिक सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया में लगातार सुधार किया जा रहा है। विभाग का लक्ष्य है कि पात्र लाभार्थियों को योजना की सहायता समय पर मिले और किसी भी स्तर पर भुगतान में अनावश्यक देरी न हो।

इन जिलों में 80 प्रतिशत से ज्यादा भुगतान

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक हाथरस, मैनपुरी, फिरोजाबाद, हरदोई, कानपुर देहात, मुजफ्फरनगर, जौनपुर, बागपत, अंबेडकरनगर और सोनभद्र में 80 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों को योजना की आर्थिक सहायता मिल चुकी है।

वहीं सिद्धार्थनगर, बहराइच और अलीगढ़ में भुगतान की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर रही है। इन जिलों में 50 प्रतिशत या उससे कम लाभार्थियों को भुगतान होने की जानकारी सामने आई है।

स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित स्थानीय अधिकारियों को भुगतान में आ रही सभी बाधाओं को दूर कर शत प्रतिशत पात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

डॉक्टर ने बताया क्यों जरूरी है संस्थागत प्रसव

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के स्त्री रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. अंजू अग्रवाल के अनुसार संस्थागत प्रसव को केवल प्रसव के स्थान में बदलाव के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। यह सीधे तौर पर मां और नवजात दोनों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने बताया कि अस्पताल में प्रसव के दौरान संभावित जटिलताओं की समय रहते पहचान की जा सकती है। स्थिति गंभीर होने पर प्रशिक्षित चिकित्सक और स्टाफ नर्स की मदद के साथ दवाएं, रक्त और आपातकालीन उपचार भी उपलब्ध कराया जा सकता है।

इससे प्रसव के दौरान मां और नवजात दोनों के स्वास्थ्य पर आने वाले गंभीर जोखिम को कम करने में मदद मिलती है।

ALSO READ THIS :  ओम प्रकाश राजभर का सपा पर हमला, बोले- अपराधियों को संरक्षण देती है पार्टी

आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका भी अहम

योजना को अधिक से अधिक महिलाओं तक पहुंचाने में आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य विभाग के फील्ड कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण बताई जा रही है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं से संपर्क कर उन्हें प्रसव पूर्व जांच के लिए स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने में मदद करती हैं।

इसके साथ ही महिलाओं और उनके परिवारों को संस्थागत प्रसव के फायदे तथा उपलब्ध सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाती है। प्रसव का समय नजदीक आने पर महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य संस्थान पहुंचाने में भी स्वास्थ्यकर्मी सहयोग करते हैं।

सुरक्षित मातृत्व की दिशा में लगातार बढ़ रहा फोकस

उत्तर प्रदेश में मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जननी सुरक्षा योजना के माध्यम से आर्थिक सहायता के साथ स्वास्थ्य विभाग की ओर से जागरूकता और निगरानी भी बढ़ाई जा रही है।

पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग अलग जिलों में योजना के बेहतर प्रदर्शन से स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद है कि आने वाले समय में और अधिक महिलाएं सुरक्षित संस्थागत प्रसव का विकल्प अपनाएंगी।

सरकार और स्वास्थ्य विभाग का फोकस अब उन जिलों में भुगतान की रफ्तार बढ़ाने पर भी है, जहां लाभार्थियों को योजना की सहायता अपेक्षित स्तर तक नहीं मिल पाई है। अधिकारियों को सभी लंबित मामलों का निस्तारण कर पात्र महिलाओं को योजना का लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

टॉप स्टोरी

ज़रूर पढ़ें