ऋषिकेश। उत्तराखंड में लगातार बारिश और भूस्खलन के चलते दो दिन स्थगित रही चारधाम यात्रा गुरुवार सुबह फिर से शुरू कर दी गई। यात्रा प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शासन और गढ़वाल आयुक्त के निर्देश पर यात्रा संचालन बहाल किया है।
यात्रा प्रशासन के विशेष कार्याधिकारी (एसओडी) प्रजापति नौटियाल ने बताया कि गुरुवार सुबह 6 बजे से चारधाम यात्रा सुचारु रूप से शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि शासन और सरकार की ओर से यदि मौसम या यात्रा व्यवस्था को लेकर कोई नया निर्देश जारी होता है तो श्रद्धालुओं को तत्काल इसकी जानकारी दी जाएगी।
भूस्खलन और भारी बारिश के अलर्ट के कारण रोकी गई थी यात्रा
इससे पहले चारधाम यात्रा मार्गों पर कई स्थानों पर भूस्खलन होने और मौसम विभाग की ओर से भारी बारिश का अलर्ट जारी किए जाने के बाद यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए 28 और 29 जुलाई को यात्रा स्थगित कर दी गई थी।
बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क मार्ग प्रभावित हुए थे। प्रशासन की ओर से लगातार स्थिति की निगरानी की जा रही थी और मार्गों को सुरक्षित बनाने के प्रयास किए गए।
अब तक 45 लाख से अधिक श्रद्धालु कर चुके हैं दर्शन
इस वर्ष लगातार बारिश और भूस्खलन का असर चारधाम यात्रा पर देखने को मिला है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु धामों के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 25 जुलाई तक कुल 45,23,412 श्रद्धालु चारधामों के दर्शन कर चुके थे। इनमें सबसे अधिक श्रद्धालु बद्रीनाथ धाम पहुंचे हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, बद्रीनाथ में 15,53,525 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जबकि केदारनाथ में 14,14,590, गंगोत्री में 7,09,418 और यमुनोत्री में 6,49,957 श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की।
यमुनोत्री से शुरू होकर बद्रीनाथ पर समाप्त होती है यात्रा
चारधाम यात्रा हिमालय क्षेत्र में स्थित चार प्रमुख धार्मिक स्थलों—यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्रा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यात्रा को दक्षिणावर्त दिशा में पूरा किया जाता है।
परंपरा के अनुसार श्रद्धालु सबसे पहले यमुनोत्री धाम पहुंचते हैं, इसके बाद गंगोत्री, फिर केदारनाथ और अंत में बद्रीनाथ धाम के दर्शन करते हैं।
ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्थित ये मंदिर हर साल लगभग छह महीने तक बंद रहते हैं। गर्मियों में अप्रैल या मई के दौरान कपाट खुलते हैं और सर्दियों की शुरुआत अक्टूबर या नवंबर में होने पर कपाट बंद कर दिए जाते हैं।
फिलहाल प्रशासन ने श्रद्धालुओं से मौसम की स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतने और यात्रा के दौरान जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।



