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मुजफ्फरनगरः 23 गांव से भरे गए पेयजल के सैंपल, प्रदूषण विभाग और जल निगम का संयुक्त कदम, जांच में खुलेंगे जल प्रदूषण के राज

Muzaffarnagar Water Samples Collected from 23 Villages
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बढ़ते जल प्रदूषण और किसानों के लगातार विरोध के बीच आखिरकार प्रशासन जागा, पहले चरण में 23 गांवों के पेयजल सैंपल लिए गए, अब रिपोर्ट से खुलेगा सच कि पानी कितना जहरीला हो चुका है?


 

मुजफ्फरनगर में पिछले काफी दिनों से प्रदूषण का मुद्दा गरमाया हुआ है। पेपर मिलों से निकलने वाले जहरीले पानी और स्लज से नदियां-तालाब काले पड़ गए हैं। किसान संगठन और ग्रामीण लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।

इसी बीच उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) ने संयुक्त रूप से बड़ा कदम उठाया है। पहले चरण में जिले के 23 गांवों के पेयजल के सैंपल लिए गए हैं। इन सैंपलों की जांच से पता चलेगा कि पानी कितना जहरीला और पीने लायक है या नहीं?

किन-किन गांवों से सैंपल लिए गए

सैंपल लिए गए गांवों में शामिल हैं

  • किशनपुरा
  • मलपुरा
  • तिस्सा
  • मोरना
  • रहकड़ा
  • बेलड़ा
  • धीराहेड़ी
  • ककराला
  • माद्दीपुर
  • नंगला बुजुर्ग
  • रूड़कली (तालिबअली)
  • रूड़कली (फतेहअली)
  • तेवड़ा
  • खेड़ी फिरोजाबाद
  • जौली
  • भंडूर
  • खोखनी
  • दौलतपुर
  • मखियाली
  • जट मुझेड़ा
  • और चांदपुर।

ये सभी गांव ऐसे हैं, जहां से पहले चरण में जल निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने सरकारी हैंडपंपों से पेयजल के सैंपल लिए।

 

Muzaffarnagar Water Samples Collected from 23 Villages

 

टीम में शामिल अधिकारी

जल निगम की तरफ से केमिस्ट मोहित और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से जेआरएफ मनीष कुमार यादव इस टीम में शामिल रहे। दोनों ने टीम के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर गांव-गांव भ्रमण कर सैंपल एकत्र किए। ग्रामीणों ने टीम का सहयोग किया और पानी की गंभीर समस्या से अवगत कराया।

 

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प्रदूषण का खतरनाक स्तर

मुजफ्फरनगर में AQI लगातार खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। पेपर मिलों से निकलता काला धुआं और स्लज नदियों-तालाबों में बह रहा है। ग्रामीणों में अस्थमा, त्वचा रोग और पेट की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। किसान संगठन लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

 

Muzaffarnagar Water Samples Collected from 23 Villages

 

सैंपल जांच से क्या उम्मीद?

ये सैंपल जांच के बाद रिपोर्ट आएगी तो पता चलेगा कि पानी में कौन-कौन से जहरीले तत्व हैं। अगर रिपोर्ट में भारी मात्रा में प्रदूषक पाए गए तो मिल मालिकों पर सख्त कार्रवाई की मांग तेज होगी। ग्रामीणों का कहना है कि अगर रिपोर्ट साफ पानी की नहीं आई तो आंदोलन और तेज होगा।

 

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प्रशासन पर बढ़ता दबाव

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जल निगम की यह कार्रवाई दबाव में लिया गया पहला ठोस कदम है। लेकिन ग्रामीण पूछ रहे हैं कि सैंपल जांच के बाद क्या होगा? क्या मिलें बंद होंगी? क्या प्रदूषित पानी की सफाई होगी? क्या पीड़ितों को मुआवजा मिलेगा? ये सवाल अभी अनुत्तरित हैं।

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