Home » उत्तर प्रदेश » मुजफ्फरनगर-गाजियाबाद समेत 9 ठिकानों पर ED की छापेमारी, फर्जी ITC नेटवर्क से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कार्रवाई

मुजफ्फरनगर-गाजियाबाद समेत 9 ठिकानों पर ED की छापेमारी, फर्जी ITC नेटवर्क से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कार्रवाई

Facebook
Twitter
WhatsApp

लखनऊ। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सोमवार को उत्तर प्रदेश और हरियाणा में बड़ा तलाशी अभियान चलाया। ईडी के लखनऊ जोनल कार्यालय की टीमों ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद तथा हरियाणा के फरीदाबाद समेत कुल नौ स्थानों पर एक साथ छापेमारी कर तलाशी ली।

यह कार्रवाई कथित तौर पर फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल के जरिए बिना वास्तविक माल की आवाजाही के इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी आईटीसी हासिल करने और उसे आगे ट्रांसफर करने से जुड़े मामले में की गई। ईडी ने यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम यानी पीएमएलए, 2002 के तहत की है।

10.28 करोड़ रुपये के आईटीसी ट्रांसफर की जांच

जांच एजेंसी के अनुसार इस मामले में जीएसटी अधिकारियों की जांच के दौरान 9.63 करोड़ रुपये के आईटीसी के कथित तौर पर गलत तरीके से लिए जाने और 10.28 करोड़ रुपये के आईटीसी को आगे ट्रांसफर किए जाने की जानकारी सामने आई।

ईडी अब इसी कथित फर्जी आईटीसी नेटवर्क से पैदा हुई अवैध कमाई और उसके इस्तेमाल की पड़ताल कर रही है। एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से किन व्यक्तियों और संस्थाओं को कथित तौर पर फायदा पहुंचा।

जंबुद्वीप एक्सपोर्ट्स एंड इंपोर्ट्स लिमिटेड से जुड़ा मामला

अधिकारियों के मुताबिक ईडी की जांच मेसर्स जंबुद्वीप एक्सपोर्ट्स एंड इंपोर्ट्स लिमिटेड से जुड़े मामले पर केंद्रित है। आरोप है कि कंपनी और उससे संबंधित संस्थाओं ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए बोगस आईटीसी तैयार करने और उसे आगे बढ़ाने की गतिविधियों में भूमिका निभाई।

ALSO READ THIS :  ओम प्रकाश राजभर का सपा पर हमला, बोले- अपराधियों को संरक्षण देती है पार्टी

जांचकर्ताओं को संदेह है कि फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल तैयार किए गए, लेकिन इन दस्तावेजों में दर्शाए गए सामान की वास्तव में कोई आवाजाही नहीं हुई।

यानी कागजों पर सामान की खरीद और बिक्री दिखाई गई, जबकि वास्तविक रूप से माल की आपूर्ति नहीं होने के बावजूद टैक्स क्रेडिट का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया।

फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल के जरिए बनाया गया नेटवर्क

ईडी की जांच के केंद्र में कथित तौर पर ऐसा नेटवर्क है जिसमें फर्जी कंपनियों और दस्तावेजों के माध्यम से आईटीसी का निर्माण और ट्रांसफर किया जाता था।

आरोप है कि इनवॉइस और ई-वे बिल में माल की आवाजाही दिखाई गई, लेकिन वास्तविक कारोबार या माल की डिलीवरी नहीं हुई। इस तरह कथित तौर पर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाते हुए टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया गया।

जांच एजेंसी अब इस नेटवर्क में शामिल कंपनियों, लेनदेन और उससे जुड़े व्यक्तियों की भूमिका का पता लगा रही है।

सर्कुलर ट्रांजेक्शन और फंड लेयरिंग का शक

अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान बड़े पैमाने पर सर्कुलर ट्रांजेक्शन के संकेत मिले हैं। इसमें कथित तौर पर एक-दूसरे से जुड़े संस्थानों के बीच ही धन का लेनदेन किया जाता था।

इसके साथ ही फंड की लेयरिंग किए जाने का भी संदेह है। लेयरिंग के तहत धन को अलग-अलग बैंक खातों और संस्थाओं के माध्यम से कई बार स्थानांतरित किया जाता है, जिससे लेनदेन की वास्तविक प्रकृति और धन के स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो सके।

ईडी इन सभी वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

ALSO READ THIS :  मुजफ़्फ़रनगर में दहाड़े CM योगी, “पाकिस्तान भूखों ही मरेगा, नया भारत विकास की राह पर”

बोगस कंपनियों के जरिए कैश निकालने का आरोप

जांच में कई ऐसी कंपनियों का भी पता चलने की बात कही गई है, जिन्हें जांच अधिकारी बोगस या अस्तित्वहीन मान रहे हैं। आरोप है कि इन कंपनियों के जरिए कथित तौर पर नकदी निकाली गई।

एजेंसी को संदेह है कि शेल कंपनियों का इस्तेमाल फर्जी आईटीसी से जुड़े धन को अलग-अलग खातों और संस्थाओं के बीच घुमाने तथा उसकी लेयरिंग के लिए किया गया।

अब ईडी इन कंपनियों के बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन, दस्तावेजों और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

नौ स्थानों पर एक साथ तलाशी

ईडी की कार्रवाई उत्तर प्रदेश और हरियाणा के नौ स्थानों पर की गई। उत्तर प्रदेश में मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद के अलावा हरियाणा के फरीदाबाद में भी तलाशी अभियान चलाया गया।

छापेमारी के दौरान एजेंसी की टीमों ने संबंधित परिसरों में दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की। जांच का उद्देश्य कथित आईटीसी नेटवर्क की पूरी संरचना को समझना और इसमें शामिल संस्थाओं के बीच वित्तीय संबंधों का पता लगाना है।

डिजिटल सबूत जुटाने में भी जुटी एजेंसी

ईडी की तलाशी केवल कागजी दस्तावेजों तक सीमित नहीं है। एजेंसी कथित नेटवर्क से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी तलाश रही है।

जांचकर्ताओं को उम्मीद है कि डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड से फर्जी इनवॉइस तैयार करने, आईटीसी ट्रांसफर करने और धन को अलग-अलग संस्थाओं के जरिए घुमाने वाले नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है।

इसके साथ ही एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस कथित नेटवर्क का संचालन कौन कर रहा था और अंतिम रूप से इससे किसे आर्थिक लाभ मिला।

ALSO READ THIS :  कानपुर में रसूख का नशा: शादी से इनकार पर रिटायर्ड IAS के बेटे ने पार की हैवानियत की हदें, बीच सड़क गर्लफ्रेंड को कार से घसीटकर ईंट से पीटा, भीड़ ने दबोचा

पीएमएलए के तहत अपराध से हुई कमाई की जांच

ईडी ने इस मामले को पीएमएलए के तहत जांच के दायरे में लिया है। जांच एजेंसी के मुताबिक कथित तौर पर गलत तरीके से हासिल और ट्रांसफर किए गए आईटीसी से उत्पन्न धन को अपराध से हुई कमाई के रूप में देखा जा रहा है।

ईडी का उद्देश्य इस कथित अवैध कमाई का पता लगाना, उसके स्रोत और इस्तेमाल की जांच करना तथा नेटवर्क में शामिल लोगों और संस्थाओं की भूमिका निर्धारित करना है।

आगे और कार्रवाई की संभावना

फिलहाल ईडी की ओर से की गई तलाशी के बाद जांच आगे बढ़ाई जा रही है। नौ स्थानों से मिले दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद कथित आईटीसी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संस्थाओं के बारे में भी जानकारी सामने आ सकती है।

जांच पूरी होने के बाद एजेंसी की ओर से आगे की कार्रवाई और संभावित कानूनी कदमों को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होगी। फिलहाल पूरा मामला जांच के अधीन है और आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।

टॉप स्टोरी

ज़रूर पढ़ें