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हल्द्वानी में राहुल गांधी के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में एफआईआर, पुलिस ने शुरू की जांच

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हल्द्वानी। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ उत्तराखंड के हल्द्वानी में एससी-एसटी एक्ट समेत भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के मुताबिक, यह प्राथमिकी हल्द्वानी निवासी अमित कुमार पुत्र त्रिलोक सिंह की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता ने राहुल गांधी के एक कथित बयान को लेकर आपत्ति जताते हुए कार्रवाई की मांग की थी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में टिप्पणी को लेकर उठे सवाल

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मामले में एफआईआर संख्या 297/2026 दर्ज की गई है। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 और 299 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(1)(q) लगाई गई है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि 11 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में आयोजित सफाई एवं धार्मिक अनुष्ठान को राहुल गांधी ने 29 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कथित तौर पर ‘छुआछूत’ से जोड़कर टिप्पणी की थी। शिकायत के अनुसार, राहुल गांधी ने इस आयोजन में शामिल लोगों के खिलाफ एससी-एसटी अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग भी की थी।

शिकायतकर्ता ने खुद को वाल्मीकि समुदाय से बताया

अमित कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में बताया है कि वह अनुसूचित जाति के वाल्मीकि समुदाय से हैं और 11 अगस्त को रामलीला मैदान में आयोजित सफाई एवं धार्मिक अनुष्ठान में स्वयं शामिल हुए थे। उनका कहना है कि कार्यक्रम का उद्देश्य मैदान की सफाई और धार्मिक एवं सांस्कृतिक मर्यादा की पुनर्स्थापना था।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, आयोजन का किसी व्यक्ति की जाति से कोई संबंध नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की कथित टिप्पणी के बाद उन्हें और समिति से जुड़े अन्य लोगों को सार्वजनिक रूप से जातिवादी तथा दलित विरोधी के रूप में चित्रित किया गया।

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सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित होने का आरोप

शिकायत में अमित कुमार ने दावा किया है कि कथित बयान के बाद उन्हें और आयोजन से जुड़े लोगों को सामाजिक स्तर पर अपमान और विरोध का सामना करना पड़ा। उन्होंने कथित तौर पर धमकी और अपमानजनक संदेश मिलने की बात भी पुलिस के सामने रखी है।

शिकायतकर्ता ने राहुल गांधी के खिलाफ एससी-एसटी अधिनियम की धारा 3(1)(q), 3(1)(r) और 3(1)(u) के साथ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196, 197 और 353 के तहत भी कार्रवाई की मांग की थी।

वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट की होगी जांच

मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। विवेचना के दौरान 29 अगस्त की प्रेस कॉन्फ्रेंस से संबंधित वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की जाएगी।

इसके अलावा पुलिस रामलीला मैदान में आठ अगस्त को आयोजित राजनीतिक कार्यक्रम तथा 11 अगस्त को हुए सफाई एवं धार्मिक अनुष्ठान से जुड़े तथ्यों की भी पड़ताल करेगी। पुलिस यह भी जांच करेगी कि आयोजन की वास्तविक प्रकृति क्या थी और राहुल गांधी की कथित टिप्पणी किन परिस्थितियों में की गई थी।

जांच के बाद सामने आएगी तस्वीर

पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्राथमिकी शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों के आधार पर दर्ज हुई है।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि एफआईआर दर्ज होना आरोपों की पुष्टि नहीं है। राहुल गांधी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की सत्यता जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निर्धारित होगी।

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