नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना गया है। किसी शुभ कार्य की शुरुआत, यात्रा, पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान या अन्य महत्वपूर्ण कार्य से पहले पंचांग देखकर तिथि, नक्षत्र, योग और शुभ-अशुभ मुहूर्त की जानकारी ली जाती है। पंचांग हिंदू काल-गणना की ऐसी पद्धति है, जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर दिन की गणना और धार्मिक महत्व बताती है।
5 सितंबर को रात तक रहेगी नवमी तिथि
5 सितंबर 2026, शनिवार को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि रात 9 बजकर 53 मिनट तक रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। शनिवार होने के कारण इस दिन भगवान शनि देव और हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व रहेगा। श्रद्धालु हनुमान जी को सिंदूर और चोला अर्पित कर पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
पंचांग के अनुसार, 5 सितंबर को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 14 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 37 मिनट पर होगा। चंद्रोदय रात 12 बजकर 48 मिनट पर होगा। अगले दिन चंद्रास्त दोपहर 2 बजकर 5 मिनट पर होगा।
मृगशिरा के बाद शुरू होगा आर्द्रा नक्षत्र
इस दिन सूर्य पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र में स्थित रहेगा। वहीं चंद्रमा रात 9 बजकर 30 मिनट तक मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इसके बाद चंद्रमा आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करेगा। नक्षत्रों की स्थिति को ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है और पंचांग में इनके आधार पर दिन के विभिन्न समयों का आकलन किया जाता है।
वज्र योग में मिलेगा अभिजित मुहूर्त का लाभ
5 सितंबर को हर्षण योग नहीं, बल्कि वज्र योग रहेगा। दिन का अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजे से 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार अभिजित मुहूर्त को दिन के प्रमुख शुभ समयों में शामिल किया जाता है।
इसके अलावा अमृत काल दोपहर 1 बजकर 16 मिनट से 2 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। शुभ कार्यों के लिए इन मुहूर्तों को ध्यान में रखा जा सकता है।
राहुकाल और अन्य अशुभ समय में नए काम से बचें
शनिवार को राहुकाल सुबह 9 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। गुलिक काल सुबह 6 बजकर 14 मिनट से 7 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। वहीं यमगंड काल दोपहर 1 बजकर 58 मिनट से 3 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।
पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड के दौरान नए और महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि दैनिक जीवन में आवश्यक कार्य इन समयों में किए जा सकते हैं।
सूर्य सिंह और चंद्रमा वृषभ राशि में रहेंगे
पंचांग के अनुसार, 5 सितंबर को सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा वृषभ राशि में रहेगा। ग्रहों की यह स्थिति ज्योतिषीय गणना के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
पूर्व और उत्तर-पूर्व दिशा में रहेगा दिशाशूल
शनिवार को पूर्व और उत्तर-पूर्व दिशा में दिशाशूल रहने की बात पंचांग में कही गई है। ज्योतिष और वास्तु से जुड़ी पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार दिशाशूल वाली दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है।
यदि किसी आवश्यक कार्य के कारण इस दिशा में यात्रा करनी पड़े तो मान्यतानुसार कुछ ज्योतिषीय उपाय करके यात्रा शुरू की जा सकती है। श्रद्धालु अपनी परंपरा और विश्वास के अनुसार इन उपायों का पालन कर सकते हैं।
शनिवार को शनि देव और हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व
शनिवार का दिन भगवान शनि देव और हनुमान जी की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु हनुमान मंदिर में जाकर पूजा कर सकते हैं और हनुमान जी को सिंदूर तथा चोला अर्पित कर सकते हैं। शनि देव की पूजा के दौरान भी श्रद्धालु अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार विधि-विधान का पालन करते हैं।
इस प्रकार 5 सितंबर 2026 का दिन भाद्रपद कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि, वज्र योग, मृगशिरा नक्षत्र और शनिवार के धार्मिक महत्व के कारण विशेष रहेगा। किसी भी शुभ कार्य या यात्रा से पहले स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।



