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राम मंदिर के नए सीईओ जितेंद्र मिश्रा पर बोले अनिरुद्धाचार्य, ‘ईमानदारी से निभाएं जिम्मेदारी’; मंदिरों की सामाजिक भूमिका पर भी रखी बात

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मथुरा। राम मंदिर के नए सीईओ जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को लेकर कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने प्रतिक्रिया दी है। शुक्रवार को उन्होंने नियुक्ति को अच्छी बात बताते हुए उम्मीद जताई कि जितेंद्र मिश्रा को जो जिम्मेदारी मिली है, उसे वह पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ निभाएंगे। उन्होंने कहा कि वह भगवान से भी यही प्रार्थना करते हैं कि नई जिम्मेदारी संभालने वाला व्यक्ति पूरी ईमानदारी से अपने दायित्वों का निर्वहन करे।

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‘मंदिर सिर्फ पूजा के लिए नहीं, समाज सेवा का भी केंद्र’

अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि सनातन धर्म में मंदिरों की परिकल्पना केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रही है। मंदिरों के माध्यम से समाज के लिए विभिन्न प्रकार के सेवा कार्य किए जाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंदिरों से गुरुकुल संचालित हों, वेदों का प्रचार हो, गौशालाएं चलें, गायों की रक्षा हो और सनातन संस्कृति का प्रचार-प्रसार हो, यह मंदिरों के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल रहा है।

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उन्होंने कहा कि मंदिर समाज को शिक्षा, सेवा और संस्कार से जोड़ने का माध्यम बन सकते हैं। उनके मुताबिक धार्मिक संस्थानों के पास उपलब्ध संसाधनों का उपयोग समाज के व्यापक हित में किया जाना चाहिए।

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अपने गौरी गोपाल मंदिर का दिया उदाहरण

अनिरुद्धाचार्य ने अपने गौरी गोपाल मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि यह अपेक्षाकृत छोटा मंदिर है, लेकिन यहां से बड़े स्तर पर सामाजिक सेवाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर से जुड़े प्रयासों के तहत 175 बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

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उन्होंने बताया कि मंदिर की गौशाला में करीब 400 गायें हैं, जबकि 150 से अधिक नंदी भी हैं। इसके अलावा अखंड रसोई के माध्यम से रोजाना हजारों लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की जाती है।

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उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर से कक्षा एक से 12वीं तक सीबीएसई बोर्ड का विद्यालय भी बनाया जा रहा है। इसमें बड़ी संख्या में बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने की योजना है।

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‘राम मंदिर से समाज के लिए और बड़े काम हो सकते हैं’

अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि जब एक छोटे से मंदिर के माध्यम से इतने बड़े स्तर पर सामाजिक कार्य किए जा सकते हैं तो राम मंदिर के माध्यम से समाज के हित में इससे कहीं बड़े स्तर पर काम किए जा सकते हैं।

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उन्होंने कहा कि मंदिर से मिलने वाले धन का उपयोग वेदों के प्रचार, गुरुकुलों के निर्माण, गौसेवा और राष्ट्रहित से जुड़े सामाजिक कार्यों में किया जाना चाहिए। उनके अनुसार मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि समाज कल्याण के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

मंदिर के धन से सेना की मदद को भी बताया अच्छा कार्य

मंदिर के धन का उपयोग सेना को आर्थिक रूप से मजबूत करने के सवाल पर भी अनिरुद्धाचार्य ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि यदि मंदिरों के माध्यम से सेना को आर्थिक रूप से मजबूत करने या राष्ट्रहित में उसकी मदद करने का काम किया जाए तो यह भी अच्छा कार्य हो सकता है।

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हालांकि उन्होंने मंदिरों की बदलती भूमिका पर सवाल भी उठाया। उन्होंने कहा कि समय के साथ मंदिरों के उद्देश्य और उनकी भूमिका में बदलाव आया है और अब मंदिरों के उद्देश्य क्या रह गए हैं, यह भगवान ही जाने।

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चंपत राय को लेकर फैसला, बोले- बैठक में मौजूद नहीं था

चंपत राय को ट्रस्ट से बाहर किए जाने और उनकी जगह गोविंद देव गिरी को नया महासचिव बनाए जाने के सवाल पर अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि वह उस बैठक में मौजूद नहीं थे, जिसमें किसी व्यक्ति को रखने या हटाने का फैसला लिया गया।

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उन्होंने कहा कि इस मामले में उनसे कोई राय नहीं ली गई थी, इसलिए वह किसी के पक्ष या विपक्ष में कुछ नहीं कह सकते। यदि उनसे राय मांगी जाती तो वह जरूर बताते कि किसी व्यक्ति को हटाने या बनाए रखने के पीछे क्या कारण होना चाहिए।

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जन्माष्टमी को लेकर बोले- खुशी और श्रद्धा से मनाएं उत्सव

जन्माष्टमी के अवसर पर अनिरुद्धाचार्य ने लोगों से भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य उत्सव को श्रद्धा और खुशी के साथ मनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि भगवान के आगमन के अवसर पर हर व्यक्ति को अपने घर में तैयारी करनी चाहिए।

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उन्होंने कहा कि सुबह स्नान करके पूजा-अर्चना करें और शाम को भगवान का अभिषेक कर प्रेम और श्रद्धा के साथ जन्माष्टमी मनाएं। उन्होंने कीर्तन करने और भगवान के नाम का जाप करने पर भी जोर दिया।

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समय बदला, लेकिन जन्माष्टमी का महत्व नहीं

अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि समय के साथ त्योहार मनाने के तौर-तरीकों में बदलाव जरूर आया है, लेकिन जन्माष्टमी का धार्मिक महत्व आज भी कायम है। उन्होंने कहा कि आज लोगों के पास जितना समय उपलब्ध है, वे उसी के अनुसार भगवान का जन्मोत्सव मनाते हैं।

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जिसके पास अधिक समय होता है, वह भव्य आयोजन करता है, जबकि कम समय वाले लोग अपने घर में ही पूजा-अर्चना करके भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मना सकते हैं। उनके मुताबिक महत्वपूर्ण यह है कि उत्सव प्रेम, श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाए।

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आरक्षण पर बोले- जरूरतमंद को मिलनी चाहिए सहायता

आरक्षण के मुद्दे पर भी अनिरुद्धाचार्य ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि जब तक किसी व्यक्ति को सहायता की जरूरत है, तब तक उसे सहायता मिलनी चाहिए। लेकिन यदि कोई व्यक्ति शिक्षा हासिल कर आगे बढ़ चुका है, रोजगार और कमाई के स्तर पर सक्षम हो गया है तथा आर्थिक रूप से मजबूत हो गया है, तो सहायता का लाभ उन लोगों तक पहुंचना चाहिए जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है।

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उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति गरीबी रेखा से ऊपर आ चुका है और उसे अब उस सहायता की आवश्यकता नहीं है तो उसका लाभ जरूरतमंद गरीब लोगों को दिया जाना चाहिए।

अनिरुद्धाचार्य के बयान में मंदिरों की धार्मिक भूमिका के साथ-साथ शिक्षा, गौसेवा, भोजन और सामाजिक सेवा जैसे कार्यों पर जोर दिखाई दिया। वहीं राम मंदिर के नए सीईओ की नियुक्ति को लेकर उन्होंने उम्मीद जताई कि नई जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी के साथ निभाई जाएगी।

 

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