नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी शुभ कार्य की शुरुआत, यात्रा, निवेश, पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान से पहले पंचांग देखकर तिथि, नक्षत्र, योग और शुभ-अशुभ समय का विचार किया जाता है। हिंदू कालगणना की यह परंपरा सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित होती है। ऐसे में रविवार 6 सितंबर 2026 का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से कई महत्वपूर्ण संयोग लेकर आ रहा है।
रात 7:29 बजे तक दशमी, फिर शुरू होगी एकादशी
पंचांग के अनुसार 6 सितंबर रविवार को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि रात 7:29 बजे तक रहेगी। इसके बाद एकादशी तिथि का आरंभ हो जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। ऐसे में शाम के समय भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करना विशेष फलदायी माना गया है।
दशमी के बाद एकादशी तिथि के प्रारंभ होने के कारण रविवार की शाम धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखेगी। श्रद्धालु भगवान विष्णु की आराधना, दीप प्रज्वलन और भक्ति भाव से पूजा कर सकते हैं।
सूर्योदय से चंद्रोदय तक जानिए दिनभर का पंचांग
6 सितंबर को सूर्योदय सुबह 6:14 बजे होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6:36 बजे होगा। वहीं चंद्रमा का चंद्रोदय रात 12:48 बजे और चंद्रास्त दोपहर 3:05 बजे होगा।
पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र में स्थित रहेगा। चंद्रमा रात 7:52 बजे तक आर्द्रा नक्षत्र में रहेगा और इसके बाद पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश करेगा। चंद्रमा की नक्षत्र स्थिति में बदलाव का भी ज्योतिषीय दृष्टि से अपना महत्व माना जाता है।
व्यतीपात योग में बनेंगे दिन के खास संयोग
रविवार को हर्षण योग के बजाय व्यतीपात योग रहेगा। वहीं दिन का अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:49 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं में अभिजित मुहूर्त को दिन के अत्यंत शुभ समय में शामिल किया जाता है। इस दौरान शुभ कार्यों की शुरुआत करना अनुकूल माना जाता है।
इसके अलावा अमृत काल सुबह 10:32 बजे से दोपहर 12:02 बजे तक रहेगा। शुभ कार्यों के लिए इस समय को भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
राहुकाल में नए काम की शुरुआत से बचने की सलाह
पंचांग के अनुसार रविवार को राहुकाल शाम 5:03 बजे से 6:36 बजे तक रहेगा। इसके अलावा गुलिक काल दोपहर 3:30 बजे से शाम 5:03 बजे तक और यमगंड काल दोपहर 12:25 बजे से 1:58 बजे तक रहेगा।
पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड जैसे समय को शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। इसलिए इन अवधियों में नए काम की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि दैनिक जीवन के आवश्यक कार्यों पर इन मान्यताओं का प्रभाव अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में भिन्न हो सकता है।
सिंह राशि में सूर्य, मिथुन में रहेगा चंद्रमा
6 सितंबर को सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा मिथुन राशि में रहेगा। ज्योतिषीय गणनाओं में सूर्य और चंद्रमा की राशि स्थिति को दिन के पंचांग का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
सूर्य की सिंह राशि में स्थिति और चंद्रमा की मिथुन राशि में मौजूदगी के आधार पर ज्योतिषीय गणनाएं की जाती हैं। धार्मिक अनुष्ठानों और व्यक्तिगत ज्योतिषीय सलाह के लिए जन्म कुंडली समेत अन्य कारकों को भी ध्यान में रखा जाता है।
पश्चिम दिशा में रहेगा दिशाशूल, यात्रा में बरतें सावधानी
रविवार को पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार दिशाशूल वाली दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि किसी कारण से पश्चिम दिशा की ओर यात्रा करना जरूरी हो, तो मान्यताओं के अनुसार संबंधित ज्योतिषीय उपाय अपनाकर यात्रा शुरू की जा सकती है।
दिशाशूल और यात्रा संबंधी मान्यताएं धार्मिक एवं ज्योतिषीय परंपराओं का हिस्सा हैं। इन्हें वैज्ञानिक तथ्य के बजाय पारंपरिक मान्यता के रूप में देखा जाता है।
6 सितंबर को ध्यान रखने योग्य प्रमुख समय
सूर्योदय: सुबह 6:14 बजे
सूर्यास्त: शाम 6:36 बजे
दशमी तिथि: रात 7:29 बजे तक
एकादशी तिथि: रात 7:29 बजे के बाद
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:49 बजे तक
अमृत काल: सुबह 10:32 बजे से दोपहर 12:02 बजे तक
राहुकाल: शाम 5:03 बजे से 6:36 बजे तक
गुलिक काल: दोपहर 3:30 बजे से शाम 5:03 बजे तक
यमगंड काल: दोपहर 12:25 बजे से 1:58 बजे तक
चंद्रोदय: रात 12:48 बजे
चंद्रास्त: दोपहर 3:05 बजे
दिशाशूल: पश्चिम दिशा



