सहारनपुर। सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने के मामले को लेकर राजनीतिक और धार्मिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। मस्जिद मामले पर मौलाना साजिद रशीदी ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कार्रवाई को संविधान पर ‘कलंक’ बताया है। वहीं ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के जनरल सेक्रेटरी मौलाना यासूब अब्बास ने भी घटना पर दुख जताते हुए दावा किया कि संबंधित मस्जिद लंबे समय से वहां मौजूद थी और इस मामले में स्टे ऑर्डर भी था। दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा ने इस घटना को लोकतंत्र से जोड़ते हुए सरकार और व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
साजिद रशीदी बोले- रात के अंधेरे में मस्जिद तोड़ दी गई
मौलाना साजिद रशीदी ने सहारनपुर मस्जिद मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि जिस तरह से मस्जिद को गिराया गया, वह संविधान पर ‘कलंक’ है। उन्होंने कहा कि आज भी उस जगह पर याकूब खान और वहीद खान के नाम दर्ज हैं। इसके बावजूद उनके मुताबिक रात के अंधेरे में बड़ी संख्या में लोगों को नजरबंद कर मस्जिद को तोड़ दिया गया।
साजिद रशीदी ने आरोप लगाया कि अदालत की ओर से आदेश दिए जाने के बाद सहारनपुर के एसएसपी ने उसे तत्काल लागू किया और इस पूरी कार्रवाई में मुसलमानों के साथ षड्यंत्र किया गया। उन्होंने सरकार से मांग की कि यदि सरकार निष्पक्ष और ईमानदार है तो एसएसपी के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
हाईकोर्ट जाने के लिए समय नहीं देने का आरोप
मौलाना साजिद रशीदी ने दावा किया कि संबंधित पक्ष के पास हाईकोर्ट जाने के लिए 22 दिन का समय बचा हुआ था, लेकिन उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मस्जिद को इस तरह गिराया गया ताकि भाजपा को राजनीतिक लाभ मिल सके।
उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई से मुसलमानों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया गया है। साजिद रशीदी ने सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
यासूब अब्बास बोले- 18वीं सदी से मौजूद थी मस्जिद
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के जनरल सेक्रेटरी मौलाना यासूब अब्बास ने भी सहारनपुर की घटना पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह बेहद अफसोस की बात है कि सहारनपुर की यह मस्जिद 18वीं सदी से वहां मौजूद थी।
यासूब अब्बास के मुताबिक मस्जिद को लेकर स्टे ऑर्डर भी था, लेकिन उनके दावे के अनुसार सहारनपुर के जिलाधिकारी ने स्टे ऑर्डर को खारिज कर दिया और इसके बाद बुलडोजर का इस्तेमाल करके मस्जिद को पूरी तरह गिरा दिया गया।
धार्मिक स्थलों को लेकर उठाया सवाल
यासूब अब्बास ने कहा कि मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, इमामबाड़े और चर्च ऐसे धार्मिक स्थल हैं, जहां लोग अपने मन की शांति के लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि अब तक किसी को इस मस्जिद से कोई शिकायत या समस्या नहीं थी।
उन्होंने घटना पर सवाल उठाते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों को लेकर संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए और किसी भी कार्रवाई से पहले सभी कानूनी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
मनोज झा बोले- पूरे दक्षिण एशिया में लोकतंत्र का दावा कैसे करेंगे
राजद सांसद मनोज झा ने भी सहारनपुर मस्जिद मामले को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने पाकिस्तान में हाल ही में कथित तौर पर 100 साल पुराने मंदिर को तोड़े जाने और उसमें तोड़फोड़ किए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि उस घटना पर भारत में सभी लोगों ने गहरी चिंता जताई थी।
मनोज झा ने सवाल किया कि जब भारत में भी इस तरह की घटनाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो आखिर किससे बात की जाए। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं के बीच भारत पूरे दक्षिण एशिया में खुद को एक जीवंत लोकतंत्र होने का दावा कैसे कर सकता है।
धार्मिक स्थल और कानून व्यवस्था पर बहस तेज
सहारनपुर मस्जिद मामले को लेकर सामने आए इन बयानों के बाद धार्मिक स्थलों, न्यायिक आदेशों और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर बहस तेज हो गई है। साजिद रशीदी और यासूब अब्बास ने जहां कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं, वहीं मनोज झा ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के व्यापक संदर्भ से जोड़कर देखा है।
मामले में सामने आए बयानों के अनुसार मुख्य विवाद मस्जिद की स्थिति, अदालत के आदेश और प्रशासन की कार्रवाई को लेकर है। हालांकि, संबंधित पक्षों के आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि इन बयानों से नहीं होती है। मामले के सभी कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं की स्थिति संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और न्यायिक प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।


