गुरुग्राम। गुरुग्राम पुलिस ने एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए फर्जी कॉल सेंटर संचालित करने के आरोप में 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी खुद को Apple कस्टमर सर्विस का प्रतिनिधि बताकर अमेरिका के नागरिकों को तकनीकी खराबी और वायरस का डर दिखाते थे। इसके बाद समस्या का समाधान करने के नाम पर पीड़ितों से हजारों डॉलर की रकम वसूलते थे।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से नौ लैपटॉप, 20 मोबाइल फोन, दो हेडफोन-माइक, दो कार, एक बाइक और एक स्कूटी बरामद की है। आरोपियों के खिलाफ साइबर अपराध पश्चिम थाना में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पालम विहार के मकान में चल रहा था फर्जी कॉल सेंटर
पुलिस के मुताबिक साइबर अपराध पश्चिम थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि पालम विहार स्थित एक मकान में बिना अनुमति फर्जी कॉल सेंटर चलाया जा रहा है। सूचना के आधार पर एक सितंबर को पुलिस टीम ने प्लॉट नंबर 1208, जे-ब्लॉक, पालम विहार में छापेमारी की।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने देखा कि कई युवक लैपटॉप, मोबाइल फोन और हेडसेट की मदद से विदेशी नागरिकों से अंग्रेजी में बातचीत कर रहे थे। पुलिस के अनुसार आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और इंटरनेट आधारित माध्यमों का इस्तेमाल कर अमेरिकी नागरिकों से संपर्क कर रहे थे।
Apple कर्मचारी बनकर अमेरिकी नागरिकों को बनाते थे निशाना
पूछताछ में पुलिस के सामने साइबर ठगी का कथित तरीका सामने आया। पुलिस के अनुसार आरोपी खुद को Apple कस्टमर सर्विस या संबंधित कंपनी का प्रतिनिधि बताते थे। इसके बाद अमेरिकी नागरिकों को उनके मोबाइल फोन में वायरस या तकनीकी खराबी होने की बात कहकर डराया जाता था।
पीड़ितों को कथित तौर पर एक वर्चुअल टोल-फ्री नंबर पर संपर्क करने के लिए कहा जाता था। इसके बाद सॉफ्टवेयर और Apple FaceTime के माध्यम से उनसे बातचीत कर उनकी तकनीकी समस्या दूर करने के नाम पर उन्हें विश्वास में लिया जाता था।
फर्जी Federal Trade Commission पत्र दिखाकर पैदा करते थे डर
पुलिस के मुताबिक ठगी के दौरान आरोपी केवल तकनीकी खराबी का डर नहीं दिखाते थे, बल्कि अमेरिकी नागरिकों को Federal Trade Commission यानी FTC के नाम से कथित फर्जी पत्र भी दिखाते थे।
इन पत्रों के जरिए पीड़ितों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की जाती थी कि उनका फोन या बैंकिंग सिस्टम किसी गंभीर साइबर समस्या में फंस गया है। इसके बाद आरोपी समस्या को ठीक करने और कथित कानूनी कार्रवाई से बचाने के नाम पर मोटी रकम की मांग करते थे।
पुलिस के अनुसार एक पीड़ित से 10 हजार से 20 हजार अमेरिकी डॉलर तक की रकम ठगे जाने के मामले सामने आए हैं।
विदेशी बैंक खातों में जमा कराई जाती थी रकम
जांच में पुलिस को पता चला कि ठगी से हासिल रकम कॉल सेंटर संचालक द्वारा उपलब्ध कराए गए विदेशी बैंक खातों में जमा कराई जाती थी। इसके अलावा आरोपियों द्वारा गिफ्ट कार्ड और वाउचर नंबर हासिल करके भी धोखाधड़ी किए जाने की जानकारी सामने आई है।
पुलिस अब इन खातों और लेनदेन की जांच कर रही है। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि ठगी से हासिल रकम किस नेटवर्क के जरिए आगे भेजी जाती थी और इस पूरे गिरोह में विदेश में बैठे लोगों की क्या भूमिका थी।
दो से तीन महीने से किराए के मकान में चल रहा था धंधा
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी पिछले दो से तीन महीनों से पालम विहार के किराए के मकान में कथित फर्जी कॉल सेंटर चला रहे थे। प्रत्येक कॉलर को कमीशन के आधार पर रखा गया था।
पुलिस के अनुसार प्रितपाल सिंह कॉल सेंटर का टीम लीडर था। वहीं पूरे नेटवर्क का संचालन एक अन्य व्यक्ति द्वारा किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस अब उस व्यक्ति की भूमिका और पहचान की भी जांच कर रही है।
11 आरोपियों की हुई गिरफ्तारी
पुलिस ने मौके से प्रितपाल सिंह, मोहम्मद रिजान अंसारी, चैतन्य गोयल, मनीष, शाहरुख अंसारी, संजीव पांडे, शिवम, आदित्य, दीपक त्रिवेदी, वरुण गौतम और नीरज को गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने आरोपियों के पास से नौ लैपटॉप और 20 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इसके अलावा दो हेडफोन-माइक, दो कार, एक बाइक और एक स्कूटी भी जब्त की गई है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच के जरिए पुलिस कॉल सेंटर से जुड़े अन्य लोगों और संभावित पीड़ितों की जानकारी जुटाने में लगी है।
विदेशी नागरिकों को निशाना बनाने वाला नेटवर्क जांच के घेरे में
गुरुग्राम पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी कॉल सेंटर से कितने अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाया गया। इसके लिए बरामद लैपटॉप और मोबाइल फोन में मौजूद डेटा, कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया अकाउंट और वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कॉल सेंटर संचालकों को अमेरिकी नागरिकों के संपर्क नंबर और अन्य जानकारी कहां से मिलती थी तथा इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं।
साइबर ठगी के नए तरीके से पुलिस भी सतर्क
इस मामले में आरोपी तकनीकी सहायता के नाम पर पहले पीड़ित को डराते और फिर कथित सरकारी दस्तावेज का सहारा लेकर विश्वास में लेते थे। इसके बाद समस्या का समाधान करने के नाम पर हजारों डॉलर की रकम हासिल की जाती थी।
गुरुग्राम पुलिस की कार्रवाई के बाद अब इस बात की भी जांच की जा रही है कि इसी तरह के अन्य कॉल सेंटर शहर या आसपास के इलाकों में तो संचालित नहीं हो रहे हैं। पुलिस ने बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच शुरू कर दी है।



