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उत्तराखंड एसटीएफ का ‘ऑपरेशन प्रहार’, फर्जी शस्त्र लाइसेंस रैकेट का एक और आरोपी गिरफ्तार, हथियार बरामद,अब तक 13 दबोचे गए

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देहरादून। उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने सूबे में अवैध हथियारों और फर्जी शस्त्र लाइसेंस के काले कारोबार के खिलाफ अपनी सर्जिकल स्ट्राइक जारी रखी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कड़े दिशा-निर्देशों के तहत चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘ऑपरेशन प्रहार’ के अंतर्गत एसटीएफ ने एक और शातिर जालसाज को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। इस ताजा गिरफ्तारी के साथ ही इस अंतरराज्यीय सिंडिकेट के भंडाफोड़ में अब तक सलाखों के पीछे पहुंचे आरोपियों की कुल संख्या बढ़कर 13 हो गई है। एसटीएफ की इस निरंतर कार्रवाई से फर्जी दस्तावेज के सहारे हथियार चमकाने वाले अपराधियों में हड़कंप मचा हुआ है।

काशीपुर में सटीक घेराबंदी, एक ही नंबर पर चल रहे थे दो-दो हथियार

एसटीएफ के आला अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान पलविंदर सिंह (46 वर्ष), पुत्र स्वर्गीय धर्म सिंह के रूप में हुई है, जो ऊधमसिंहनगर जनपद के थाना काशीपुर अंतर्गत ग्राम कचनालगाजी का मूल निवासी है। एसटीएफ की तफ्तीश में एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर घालमेल सामने आया है। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी ने एक ही फर्जी शस्त्र लाइसेंस नंबर का उपयोग करके दो पूरी तरह से कूटरचित (फर्जी) लाइसेंस तैयार कर रखे थे। इतना ही नहीं, इन्हीं नकली दस्तावेजों के दम पर उसने बाजार से धोखे से दो अलग-अलग घातक हथियार भी खरीद लिए थे।

एसटीएफ की एक विशेष टीम ने रविवार को काशीपुर क्षेत्र में मुखबिर की सटीक और पुख्ता सूचना के आधार पर त्वरित छापेमारी करते हुए पलविंदर को दबोच लिया। तलाशी के दौरान आरोपी के कब्जे से .30 बोर की एक अत्याधुनिक सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल, .315 बोर की एक रायफल, दोनों ही हथियारों के चार-चार जिंदा कारतूस और वह जाली शस्त्र लाइसेंस बरामद किया गया है, जिसके सहारे यह पूरा खेल खेला जा रहा था।

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‘ऑपरेशन प्रहार’ का महा-एक्शन: अब तक 19 अवैध हथियार और 358 कारतूस जब्त

विशेष कार्यबल (एसटीएफ) ने बताया कि मुख्यमंत्री के आदेश पर जारी ‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत अब तक इस रैकेट से जुड़े 13 बड़े और छोटे चेहरों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस देशव्यापी नेटवर्क के पास से अब तक कुल 19 अवैध और संदिग्ध असलहे, 358 जिंदा कारतूस समेत भारी मात्रा में फर्जी मोहरें, सरकारी कागजात और संदिग्ध शस्त्र लाइसेंस की कॉपियां बरामद की जा चुकी हैं। मामले के तार अन्य राज्यों से भी जुड़ते दिख रहे हैं, जिसके चलते एसटीएफ इस नेटवर्क के मुख्य सरगनाओं और इसमें संलिप्त सरकारी कर्मियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है। जांच की व्यापकता और राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए यह पूरा मामला अब बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है।

एसटीएफ की दोटूक चेतावनी, आत्मसमर्पण करें फर्जी लाइसेंस धारक

कार्रवाई को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाली इस टीम में इंस्पेक्टर अरुण कुमार, इंस्पेक्टर एम.पी. सिंह, सब-इंस्पेक्टर प्रकाश भगत के साथ हेड कांस्टेबल मोहित वर्मा, कांस्टेबल रवि बोरा, संजय कुमार, मनोज बवाड़ी और सुरेंद्र कनवाल शामिल रहे, जिनकी मुस्तैदी की सराहना की जा रही है। इस बड़ी कामयाबी के बाद एसटीएफ ने प्रदेश के ऐसे सभी लोगों को कड़ी और अंतिम चेतावनी जारी की है, जिन्होंने किसी भी माध्यम से फर्जी या संदिग्ध तरीके से शस्त्र लाइसेंस बनवाए हैं। एसटीएफ ने अपील की है कि ऐसे लोग कानूनी पेचीदगियों और कठोर दंडात्मक कार्रवाई से बचने के लिए खुद ही अपने हथियारों और दस्तावेजों के साथ पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दें, अन्यथा चिन्हित होने पर उनके खिलाफ गैंगस्टर और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गंभीर धाराओं के तहत बेहद सख्त कानूनी एक्शन लिया जाना तय है।

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