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वन्यजीव सप्ताह में बेटियों ने लिया संरक्षण का संकल्प! बुढ़ाना गर्ल्स कॉलेज में क्विज-वर्कशॉप, सफल प्रतिभागियों को किया सम्मानित

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मुजफ्फरनगर। वन्यजीव सप्ताह-2026 के अंतर्गत सोमवार को बुढ़ाना स्थित मैपल्स ग्रुप ऑफ हायर एजुकेशन गर्ल्स कॉलेज में वन्यजीव संरक्षण को लेकर जनजागरूकता कार्यशाला और क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य संदेश “बेटियों ने ली जिम्मेदारी, वन्यजीव संरक्षण में करेंगी भागीदारी” रहा। प्रतियोगिता में छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और वन्यजीवों, जैव विविधता तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सवालों के जवाब देकर अपनी जानकारी का प्रदर्शन किया। सफल प्रतिभागियों को उपहार देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का आयोजन जिलाधिकारी उमेश मिश्रा और मुख्य विकास अधिकारी के निर्देशन तथा प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी प्रभाग अभिनव राज के मार्गदर्शन में समिति सदस्य डॉ. राजीव कुमार द्वारा कराया गया। वन्यजीव सप्ताह के दौरान आयोजित कार्यक्रम में छात्राओं को वन्यजीव संरक्षण के महत्व के साथ-साथ मानव और वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी गई।

‘जुड़े आवास, वन्य जीवन का विकास’ है इस वर्ष की थीम

वन्यजीव सप्ताह-2026 की थीम “जुड़े आवास, वन्य जीवन का विकास” (Connecting Habitats, Thriving Wildlife) रखी गई है। कार्यक्रम में बताया गया कि वन्यजीवों के संरक्षण के लिए केवल अलग-अलग प्रजातियों की सुरक्षा पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखना और उन्हें आपस में जोड़ना भी बेहद जरूरी है।

वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए प्राकृतिक गलियारों यानी वाइल्डलाइफ कॉरिडोर का संरक्षण मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कार्यशाला में छात्राओं को बताया गया कि तेजी से बदलते पर्यावरण और प्राकृतिक आवासों पर बढ़ते दबाव के बीच वन्यजीव संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी बन गया है।

दो से आठ अक्टूबर तक मनाया जाता है वन्यजीव सप्ताह

कार्यशाला में बताया गया कि भारत में प्रत्येक वर्ष दो से आठ अक्टूबर तक वन्यजीव सप्ताह मनाया जाता है। इसका उद्देश्य वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के प्रति आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। वन्यजीव सप्ताह की शुरुआत वर्ष 1952 में भारतीय वन्यजीव बोर्ड द्वारा की गई थी, जिसके बाद यह देश में वन्यजीव संरक्षण से जुड़ा महत्वपूर्ण वार्षिक आयोजन बन गया।

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कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को वन्यजीव संरक्षण से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों और कानूनों की भी जानकारी दी गई। बताया गया कि वन्यजीवों और उनके आवासों की सुरक्षा के लिए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 सहित विभिन्न कानूनी प्रावधान लागू हैं। देश में राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य और बायोस्फीयर रिजर्व जैसे संरक्षित क्षेत्र भी वन्यजीव संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

जलवायु परिवर्तन और आवासों का विनाश बड़ी चुनौती

कार्यशाला में वन्यजीवों के सामने मौजूद प्रमुख चुनौतियों पर भी चर्चा की गई। जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आवासों का विनाश और अवैध शिकार को वन्यजीव संरक्षण के लिए बड़ी चुनौतियों के रूप में बताया गया।

छात्राओं को समझाया गया कि प्रत्येक वन्यजीव प्रजाति पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। किसी एक प्रजाति के कम होने या समाप्त होने का प्रभाव पूरी खाद्य श्रृंखला और पारिस्थितिक संतुलन पर पड़ सकता है। जैव विविधता का संरक्षण पृथ्वी पर जीवन के संतुलन के लिए आवश्यक है।

वन्यजीव संरक्षण से जुड़े पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ बताए

कार्यशाला में बताया गया कि वन्यजीव और जैव विविधता केवल प्राकृतिक सुंदरता का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि मानव जीवन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। विभिन्न प्रजातियां परागण, जल शुद्धिकरण और मिट्टी निर्माण जैसी पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं में योगदान देती हैं।

इसके अलावा कई वन्यजीव प्रजातियों से जुड़े जैविक संसाधन चिकित्सा अनुसंधान के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। वन्यजीव पर्यटन और इको-टूरिज्म स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के साथ रोजगार के अवसर भी पैदा करते हैं। संरक्षण के प्रयास मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और सह-अस्तित्व की भावना को बढ़ावा देने में मदद करते हैं।

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SDG-15 के तहत ‘भूमि पर जीवन’ के संरक्षण पर जोर

कार्यशाला में संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-15 यानी ‘भूमि पर जीवन’ (Life on Land) के बारे में भी छात्राओं को जानकारी दी गई। बताया गया कि इस लक्ष्य का उद्देश्य स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र, वनों और जैव विविधता का संरक्षण तथा उनके सतत उपयोग को बढ़ावा देना है।

वन्यजीवों और उनके आवासों की रक्षा, अवैध शिकार और वन्यजीवों की अवैध तस्करी पर रोक, प्राकृतिक आवासों का संरक्षण तथा जैव विविधता के नुकसान को रोकना इसके महत्वपूर्ण पहलुओं में शामिल हैं। वनों के सतत प्रबंधन, वनों की कटाई रोकने और मानव तथा प्रकृति के बीच संतुलित सह-अस्तित्व को भी महत्वपूर्ण बताया गया।

क्विज प्रतियोगिता के सफल प्रतिभागियों को किया सम्मानित

वन्यजीव सप्ताह के अंतर्गत आयोजित क्विज प्रतियोगिता में छात्राओं ने उत्साह के साथ प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता में सफल प्रतिभागियों छवि, गरिमा, दिव्या, पायल, अनुष्का, नेहा, नीलू, स्वीटी, गौरी और आंचल आदि को डॉ. राजीव कुमार ने उपहार भेंट कर सम्मानित किया।

कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को वन्यजीव संरक्षण को केवल एक सरकारी जिम्मेदारी न मानकर इसमें व्यक्तिगत और सामाजिक भागीदारी सुनिश्चित करने का संदेश दिया गया। छात्राओं ने भी पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के प्रति अपनी भूमिका निभाने का संकल्प व्यक्त किया।

प्राचार्य और निदेशक का रहा महत्वपूर्ण योगदान

जनजागरूकता कार्यक्रम को सफल बनाने में मैपल्स ग्रुप ऑफ हायर एजुकेशन गर्ल्स कॉलेज, बुढ़ाना की प्राचार्य डॉ. मधु शर्मा और निदेशक डॉ. दिव्या जैन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को वन्यजीवों के संरक्षण, जैव विविधता की सुरक्षा और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार के लिए प्रेरित किया गया।

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कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि वन्यजीव संरक्षण केवल जंगलों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध मानव जीवन, पर्यावरणीय संतुलन और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से है। ऐसे में समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी से ही “सह-अस्तित्व की अनूठी मिसाल, वन्यजीव संरक्षण में यूपी बेमिसाल” के संदेश को सार्थक किया जा सकता है।

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