बागपत। जनपद के विकासखंड बड़ौत में जनपद स्तरीय रक्षक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें महिलाओं को बाल विवाह की रोकथाम, बाल अधिकारों और बाल संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी गई। कार्यशाला में कुल 32 महिलाओं ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का उद्देश्य बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण में सामुदायिक सहभागिता को मजबूत करना रहा।
कार्यशाला में महिला एवं बाल कल्याण विभाग से मोहित कुमार, ग्राम प्रधान रूबी, ग्रामीण समाज विकास केंद्र के जिला समन्वयक अमित कुमार, सीएसडब्ल्यू अनमोल गुप्ता और प्रिंस कुमार उपस्थित रहे।
बाल विवाह के दुष्परिणामों की दी जानकारी
कार्यशाला के दौरान महिलाओं को बताया गया कि बाल विवाह बच्चों के अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य और उनके सुरक्षित भविष्य को प्रभावित करता है। प्रतिभागियों को बाल विवाह की पहचान, इसकी रोकथाम और बाल संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। साथ ही उन्हें अपने आसपास बाल विवाह जैसी घटनाओं को रोकने के लिए जागरूक रहने और जरूरत पड़ने पर संबंधित विभागों तक सूचना पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया।
वक्ताओं ने कहा कि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि परिवार और समुदाय की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है।
साइमा और नईमा ने साझा किए बाल विवाह के अनुभव
कार्यशाला का महत्वपूर्ण पहलू बाल विवाह से प्रभावित महिलाओं की आपबीती रही। इस दौरान साइमा और नईमा ने अपने बाल विवाह से जुड़े व्यक्तिगत अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि कम उम्र में विवाह होने के कारण उन्हें किन कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
दोनों महिलाओं के अनुभवों ने उपस्थित प्रतिभागियों को बाल विवाह के वास्तविक दुष्परिणामों से रूबरू कराया। उनकी कहानियों से प्रेरित होकर महिलाओं ने इस सामाजिक कुरीति के खिलाफ आवाज उठाने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा में अपनी भूमिका निभाने का संकल्प लिया।
बाल विवाह मुक्त समाज के लिए सामुदायिक सहभागिता जरूरी
ग्रामीण समाज विकास केंद्र के सचिव मेहर चंद ने बाल विवाह की रोकथाम के लिए जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर भविष्य का अवसर देना सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यशाला के अंत में महिलाओं को बाल विवाह रोकने, बाल अधिकारों के संरक्षण और अपने समुदाय में जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया गया।
