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NHAI टोल प्लाजा फर्जीवाड़े पर ED का बड़ा शिकंजा, 7 राज्यों और NCR में 14 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी

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लखनऊ। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी NHAI के टोल प्लाजा पर कथित फर्जी वसूली और सरकारी राजस्व को डायवर्ट किए जाने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई शुरू की। ईडी के लखनऊ जोनल ऑफिस की टीम ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी पीएमएलए 2002 की धारा 17 के तहत देश के कई हिस्सों में एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया है।

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ईडी की यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू, मध्य प्रदेश, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और कोलकाता समेत कई स्थानों पर की जा रही है। जांच एजेंसी का फोकस कथित तौर पर टोल प्लाजा पर इस्तेमाल किए जा रहे अनधिकृत सॉफ्टवेयर, फर्जी टोल रसीदों और सरकारी अकाउंटिंग सिस्टम से बाहर रकम डायवर्ट किए जाने से जुड़े डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों पर है।

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फर्जी टोल रसीदों का खेल! अनधिकृत सॉफ्टवेयर से सरकारी राजस्व में सेंध का आरोप

ईडी के अनुसार यह जांच 22 जनवरी 2025 को दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। जांच के दौरान एजेंसी को कथित तौर पर पता चला कि कुछ टोल प्लाजा पर अनधिकृत सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन का इस्तेमाल किया जा रहा था।

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आरोप है कि इस सॉफ्टवेयर के जरिए फर्जी टोल रसीदें तैयार की जा रही थीं। इसके बाद टोल वसूली से प्राप्त रकम को सरकारी अकाउंटिंग सिस्टम से बाहर डायवर्ट किए जाने की आशंका सामने आई। जांच एजेंसी अब इस कथित नेटवर्क में शामिल लोगों और रकम के पूरे लेनदेन का पता लगाने में जुटी है।

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NHAI रिकॉर्ड और फॉरेंसिक जांच में भी सामने आया सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल

ईडी ने बताया कि NHAI से प्राप्त रिकॉर्ड की जांच और फॉरेंसिक विश्लेषण के दौरान भी ऐसे अनधिकृत सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल की पुष्टि हुई है। एजेंसी अब डिजिटल उपकरणों, दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के जरिए पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने की कोशिश कर रही है।

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तलाशी अभियान का उद्देश्य कथित अपराध से जुड़े डिजिटल एवं दस्तावेजी सबूत जुटाना, इसमें शामिल लोगों की पहचान करना और कथित तौर पर अपराध से अर्जित रकम का पता लगाना है।

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कई राज्यों तक फैला तलाशी अभियान, जांच में जुटी ईडी

ईडी की कार्रवाई का दायरा कई राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों तक फैला हुआ है। उत्तर प्रदेश के अलावा राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू, मध्य प्रदेश और एनसीआर के विभिन्न ठिकानों पर तलाशी ली जा रही है। कोलकाता में भी जांच एजेंसी की कार्रवाई जारी है।

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इतने व्यापक स्तर पर तलाशी अभियान से संकेत मिलता है कि एजेंसी कथित फर्जी टोल वसूली के नेटवर्क से जुड़े लोगों, संस्थाओं और वित्तीय लेनदेन की गहराई से पड़ताल कर रही है। हालांकि मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

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अक्षता मिनरल्स मामले में 3.31 करोड़ की चल संपत्ति अटैच

इसी बीच ईडी ने एक अन्य मनी लॉन्ड्रिंग मामले में करीब 3.31 करोड़ रुपये की चल संपत्ति अटैच की है। यह कार्रवाई अक्षता मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड और अन्य से जुड़े मामले में की गई है।

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ईडी के बेंगलुरु जोनल ऑफिस ने 1 सितंबर को पीएमएलए की धारा 5 की उपधारा 1 के तहत प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया था। इसके तहत एचडीएफसी बैलेंस्ड एडवांटेज फंड की 62,914.316 यूनिट्स को अटैच किया गया है।

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CBI की FIR के आधार पर शुरू हुई थी मनी लॉन्ड्रिंग जांच

ईडी के मुताबिक अक्षता मिनरल्स से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI की एंटी करप्शन ब्यूरो बेंगलुरु द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी।

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एफआईआर में अक्षता मिनरल्स, उसके निदेशकों और अन्य लोगों पर कथित धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। ईडी इसी कथित अपराध से जुड़े वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों की जांच कर रही है।

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भूपेश बघेल के पूर्व निजी सहायक के ठिकाने पर भी पहुंची थी ED

मंगलवार को ईडी ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पूर्व निजी सहायक केके चंद्रवंशी उर्फ केके चंद्राकर के घर पर भी तलाशी अभियान चलाया था। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग यानी CGPSC में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई।

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सूत्रों के मुताबिक ईडी के पांच से आठ अधिकारियों की टीम सुबह करीब छह बजे दो वाहनों से दुर्ग जिले के पुराने भिलाई क्षेत्र स्थित चंद्रवंशी के घर पहुंची थी। अधिकारियों ने घर के भीतर दस्तावेजों और अन्य सामग्री की जांच की, जबकि सुरक्षा बलों की तैनाती बाहर की गई थी।

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NHAI टोल मामले में आगे की जांच जारी

NHAI टोल प्लाजा से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में ईडी की कार्रवाई अभी जारी है। एजेंसी तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि कथित तौर पर फर्जी रसीदें कैसे तैयार की जाती थीं, रकम किस तरीके से सरकारी सिस्टम से बाहर जाती थी और इसमें किन लोगों की भूमिका थी।

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ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जांच जारी है। तलाशी से मिलने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

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