मुज़फ़्फ़रनगर में नकली DEF (Diesel Exhaust Fluid) के खिलाफ पुलिस और कृषि विभाग की लगातार कार्रवाई के बाद भले ही स्थानीय स्तर पर संचालित कई कथित निर्माण इकाइयों पर ब्रेक लगा हो, लेकिन काले कारोबार की सप्लाई चेन अब भी पूरी तरह खत्म होती नहीं दिख रही। ‘The X India’ की पड़ताल और इस नेटवर्क से जुड़े विभिन्न सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, स्थानीय उत्पादन प्रभावित होने के बाद अब कथित तौर पर रामपुर और मुरादाबाद से तैयार नकली DEF मुज़फ़्फ़रनगर लाकर खपाया जा रहा है। यदि इन इनपुट्स की पुष्टि होती है, तो यह संकेत है कि कार्रवाई के दबाव में नेटवर्क ने अपना तरीका बदला है, कारोबार नहीं।
मुज़फ्फ़रनगर। पुलिस और कृषि विभाग की लगातार कार्रवाई ने भले ही जिले में नकली DEF बनाने वाले कई बड़े खिलाड़ियों की कमर तोड़ दी हो, लेकिन इस काले कारोबार का नेटवर्क अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अब इस अवैध धंधे से जुड़े माफियाओं ने अपना नया ठिकाना और नया सप्लाई नेटवर्क तैयार कर लिया है। मुज़फ्फ़रनगर में अब रामपुर और मुरादाबाद में तैयार किया गया नकली DEF बड़े पैमाने पर खपाया जा रहा है।

जिले में छापेमारी, मुकदमे, गिरफ्तारी और लगातार मीडिया में मामला सुर्खियों में रहने की वजह से स्थानीय स्तर पर नकली DEF बनाने वाली कई यूनिटें फिलहाल बंद हो गई हैं। इससे इसके काले बाजार में कथित तौर पर कमी पैदा हुई, लेकिन माफियाओं ने इसे भी अपने धंधे का मौका बना लिया। अब तैयार माल बाहर से मंगाकर मुज़फ्फ़रनगर में उतारा जा रहा है, ताकि लाखों रुपये के इस काले कारोबार की सप्लाई चेन किसी भी कीमत पर न टूटे।
निजी के साथ भाड़े के वाहनों से ट्रांसपोर्टेशन
सूत्र बताते हैं कि पहले अपने निजी और स्थायी वाहनों जैसे से माल ढोने वाले तस्कर अब पुलिस की निगरानी से बचने के लिए अक्सर किराए के छोटा हाथी, टाटा इंट्रा वी–30, अशोक लीलैंड और बुलेरो पिकअप आदि का इस्तेमाल कर रहे हैं।

बिजनौर के रास्ते तस्करी
बिजनौर के रामपुर और मुरादाबाद से नकली DEF की तस्करी इस वक्त बड़े पैमाने पर की जा रही है, जिसके लिए बिजनौर होते हुए मुख्य रूप से दो रास्ते रूट अपनाए जा रहे हैं। पहला गंगा बैराज पार करने के बाद और दूसरा हस्तिनापुर के बाद ये वाहन मुज़फ्फ़रनगर की सीमा में प्रवेश करते हैं और फिर हर खेप के साथ रूट बदल दिया जाता है।
कभी मीरापुर से बेहड़ा सादात–जौली रोड, कभी पानीपत खटीमा राष्ट्रीय राजमार्ग का जानसठ–मुजफ्फरनगर रोड, कभी कभी मेरठ–मवाना होकर खतौली तो कभी–कभी गांव देहात के बेहद संकरे रस्तेरास्ते माल पहुंचाया जा रहा है। इसके पीछे DEF के खेल के इन खिलाड़ियों का मकसद साफ है… और वो है पुलिस की आंखों में धूल झोंकना और हर बार नया रास्ता अपनाकर कार्रवाई से बच निकलना।

पुराने चेहरे गायब… या पर्दे के पीछे?
सूत्रों का यह भी कहना है कि इस धंधे से जुड़े कुछ चेहरे पहले भी जेल की हवा खा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। अब कथित तौर पर पर्दे के पीछे रहकर नए लोगों और किराए के संसाधनों के सहारे कारोबार को जिंदा रखने की कोशिश की जा रही है।
इनपुट्स के अनुसार, अब कथित तौर पर फ्रंट पर नए चेहरे और किराये के संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि पुराने संचालक पर्दे के पीछे रहकर सप्लाई चेन को संचालित करने की कोशिश कर रहे हैं।
बड़ी चुनौती: सप्लाई चेन पर कब लगेगा ब्रेक?
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी अवैध कारोबार की रीढ़ उसका उत्पादन नहीं, बल्कि उसकी सप्लाई चेन होती है।
यदि वास्तव में नकली DEF बाहर से मुज़फ़्फ़रनगर लाया जा रहा है, तो केवल स्थानीय कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। ऐसे में अंतरजनपदीय स्तर पर समन्वित जांच और निगरानी की आवश्यकता होगी।
फिलहाल पुलिस और कृषि विभाग पहले ही संकेत दे चुके हैं कि यूरिया की कालाबाजारी और नकली DEF नेटवर्क से जुड़े हर स्तर तक पहुंचने का प्रयास जारी है। अब यह देखना होगा कि जांच की अगली कड़ी इस कथित नई सप्लाई चेन तक पहुंच पाती है या नहीं।
यदि समय रहते इस अंतरजनपदीय सप्लाई चेन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो आशंका है कि जिले में नकली DEF का अवैध कारोबार फिर उसी रफ्तार से सक्रिय हो सकता है, जैसा पहले देखा जा चुका है।



